दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए बंद या लॉक कर दिया गया है। पुलिस ने इन खबरों को "पूरी तरह झूठा, भ्रामक और तथ्यों से परे" बताया। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर शांतिपूर्ण और अधिकृत प्रदर्शनों के लिए अभी भी सक्रिय और अधिकृत स्थल है। पुलिस के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उसके अनुपालन में जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत यहां अधिकतम 1,000 लोगों को प्रदर्शन की अनुमति दी जा सकती है।
पुलिस ने बताया कि संबंधित आयोजकों या व्यक्तियों की ओर से औपचारिक आवेदन मिलने के बाद सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों के पालन के आधार पर प्रदर्शन की अनुमति दी जाती है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करें और न ही उन्हें आगे प्रसारित करें। सही और विश्वसनीय जानकारी के लिए केवल आधिकारिक संचार माध्यमों पर भरोसा करने की सलाह दी गई है।
इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की थी। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा, "छात्र न्याय के हकदार हैं। हमारे छात्रों के खिलाफ हुई बर्बरता की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाना चाहिए।"
राहुल गांधी ने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई दिखाई गई है। वीडियो में पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करते हुए देखा जा सकता है। वहीं, वीडियो में एक सादे कपड़ों में व्यक्ति कथित तौर पर भारतीय झंडा लेकर प्रदर्शन कर रहे एक छात्र को सड़क पर पटकता हुआ भी नजर आ रहा है।
राहुल गांधी की यह मांग ऐसे समय में आई है, जब विपक्षी सांसदों ने गुरुवार को संसद परिसर के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और अयोध्या स्थित राम मंदिर में चंदे के कथित गबन के मुद्दे को लेकर विरोध जताया।इंडिया गठबंधन के कई दलों के सांसद सुबह करीब 10:30 बजे मकर द्वार पर एकत्र हुए। उनके हाथों में पोस्टर और तख्तियां थीं, जिन पर 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई के आदेश देने वाले व्यक्ति को लेकर सवाल उठाए गए। विपक्षी सांसदों ने छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग को लेकर केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। इसके साथ ही अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दिए गए चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर भी केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।