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राज्यसभा में पी. टी. ऊषा ने खेल शासन विधेयक का किया समर्थन, बताया ऐतिहासिक कदम

New Delhi: भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और राज्यसभा की मनोनीत सदस्य पी. टी. ऊषा ने मंगलवार को राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ये विधेयक दशकों से चले आ रही अव्यवस्था को खत्म कर पारदर्शिता और जवाबदेही लाएगा।

इस विधेयक को लोकसभा ने सोमवार को पारित किया था। राज्यसभा में चर्चा के दौरान पी.टी. ऊषा ने कहा कि ये विधेयक खेल प्रशासनों में सुधार लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने राष्ट्रीय खेल बोर्ड के गठन के प्रस्ताव का स्वागत किया, जिसे सभी खेल महासंघों को मान्यता देने का अधिकार होगा। केंद्रीय फंड पाने के लिए एनएसबी से संबद्धता अनिवार्य होगी।

पी.टी. ऊषा ने कहा, "आज का दिन मेरे लिए और देश के लिए ऐतिहासिक है। 1984 में जब मैं लॉस एंजेलिस ओलंपिक में मेडल से चूक गई थी, तब कोई प्रभावी खेल कानून नहीं था। आज चार दशक बाद, यह सपना हकीकत बन रहा है।"

उन्होंने आगे कहा कि ये विधेयक खिलाड़ियों को सशक्त बनाएगा और प्रायोजकों के अलावा महासंघों के बीच विश्वास पैदा करेगा। उन्होंने इसे 2036 ओलंपिक की भारत की दावेदारी के लिए भी अहम बताया। पी.टी. ऊषा ने कहा, "यह विधेयक पारदर्शिता, जवाबदेही और लिंग समानता को बढ़ावा देगा। यह एक नैतिक वादा है कि अब खिलाड़ी एक उदासीन प्रणाली का शिकार नहीं होंगे।"

उन्होंने राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक का भी समर्थन किया, जो राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी की स्वतंत्रता को मजबूत करता है और राष्ट्रीय डोपिंग रोधी बोर्ड के गठन का प्रस्ताव रखता है। पी.टी. ऊषा ने कहा, "स्वच्छ खेल संस्कृति लाने के लिए यह विधेयक बहुत जरूरी है। यह खिलाड़ियों को एक स्पष्ट रास्ता दिखाएगा।"