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पौराणिक कथाओं में छिपा जीवन का सार

हिंदू पौराणिक कथाएं हमारी भारतीय परंपरा और धर्म की आत्मा है। यह कथाएं मनुष्य के जीवन में बहुत ही ज्यादा महत्त्व रखती है, परंतु हमारा आज का युग यह सब भूलता जा रहा है। कहते हैं कि समय बहुत बलवान है, तो चलिए उस समय में जब इस संपूर्ण विश्व का निर्माण हुआ था। हिंदू कथा के अनुसार इस संसार की रचना त्रिदेवों ने की थी- ब्रह्मा, विष्णु और महेश। इनके साथ साथ देवी दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, काली आदि शक्तियों को उस समय भी सामान्य रूप से पूजा जाता था। इसी युग में देवताओं और असुरों की लड़ाई हुई। ये लड़ाई बुराई पर अच्छाई कि जीत को दर्शाती है। इस युग को हम सतयुग भी बोलते हैं।

अब चलते हैं त्रेता युग की ओर। त्रेता युग भगवान राम द्वारा समुद्र लांग कर हुआ। यह युग भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन की गाथा है, जिसमें कर्तव्य, धर्म और भक्ति की गहराई पूर्ण रूप से झलकती है। अब चलते है द्वापर युग में जहां भाई भाई एक दूसरे पर टूट पड़े, समुद्र के भीतर नहीं बल्कि धरती पर ही भिड़ पड़े। ये महाभारत का युग था जो पांडवों और कौरवों के बीच हुआ था। ये एक धर्मयुद्ध था। इस युग में भगवान श्री क्रष्ण द्वारा सुनाया गया भगवत गीता का उपदेश आज भी हमारे जीवन को मार्ग दिखाता है। यह कथाएं सिर्फ धर्म की बात नहीं करती बल्कि जीवन की कला भी सिखाती हैं।