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अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का भारत पर क्या होगा असर?

अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार ऐतिहासिक शांति समझौता हो गया है, जिससे 100 दिनों से चला आ रहा युद्ध रुक गया है। स्विट्जरलैंड में हुए इस समझौते के बाद, शुक्रवार से रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को फिर से खोल दिया जाएगा। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का भारत पर भी असर देखने को मिल रहा है। 

100 से ज्यादा दिन के टकराव और संघर्ष के बाद रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई। दोनों देश युद्ध रोकने और ग्लोबल सप्लाई चेन में स्थिरता लाने पर राजी हो गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि स्विट्जरलैंड में शांति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद शुक्रवार को रणनैतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा।

इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग के खुलने से भारत को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 फीसदी कच्चा माल दूसरे देशों से आयात करता है, जिसमें से करीब 60 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इसके अलावा भारत का करीब 85 प्रतिशत एलपीजी आयात भी इसी समुद्री मार्ग से होता है।

इसी साल 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ युद्ध की शुरुआत की थी, तभी से रुकावट के कारण घरेलू बाजार में सप्लाई चेन में दबाव बना हुआ था। इससे ईंधन और ऊर्जा की लागत बढ़ी थी और मई में महंगाई भी तेजी से बढ़ गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति समझौते के ऐलान के बाद दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई जिससे सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 60 पैसे मजबूत होकर 94.58 पर बंद हुआ।

शांति समझौते की बात करें तो अमेरिका ईरानी बंदरगाहों से अपनी सैन्य नाकेबंदी को हटाएगा। अमेरिका का ये कदम भारत के शिपिंग सेक्टर के लिए राहत की बात है क्योंकि हाल के हफ्तों में इस इलाके में आई रुकावटों के कारण भारत को ज्यादा जोखिम का सामना करना पड़ा था। पिछले हफ्ते भारतीय कमर्शियल टैंकरों पर हमले हुए थे जिनमें तीन भारतीय नाविक मारे गए थे।

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर मध्यस्थों ने अहम भूमिका निभाई, जिनमें पाकिस्तान और कतर शामिल है। दोनों देशों ने शुरुआत में अमेरिका और ईरान को आठ अप्रैल को दो हफ्ते के सीजफायर समझौते के लिए राजी किया था। बातचीत पूरी होने तक इस सीजफायर को आगे बढ़ाया गया था। ये समझौता महीनों तक बढ़ते तनाव और सैन्य टकराव के बाद हुआ है।

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। इस हमले में तेहरान के कई आला नेताओं की जान चली गई थी, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल थे। खामेनेई के बेटे मोजतबा अब ईरान के सुप्रीम लीडर हैं लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है।