Breaking News

'मिशन दृष्टि' की कामयाबी पर बोले PM मोदी- युवाओं ने कर दिखाया कमाल     |   ईरान और ओमान के विदेश मंत्रियों की फोन पर बातचीत, क्षेत्रीय हालात पर चर्चा     |   झारखंड कांग्रेस की 36 सदस्यीय राजनीतिक समिति गठित     |   ईरान और जर्मनी के विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर बातचीत, क्षेत्रीय हालात पर चर्चा     |   उरी-बारामूला नेशनल हाईवे पर भूस्खलन, यातायात पूरी तरह बाधित     |  

मॉक ड्रिल क्या होता है? कहां-कहां हो रहा है ये, जानिए हर एक बात

Mock Drill in India: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद से भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। दोनों तरफ से युद्ध की आशंका जाहिर की जा रही है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कई राज्यों को सात मई को मॉक ड्रिल के निर्देश दिए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर कोई आपातकालीन स्थिति आए तो अपने देश के नागरिकों को बचाया जा सके। इसमें हवाई हमला होने की स्थिति में क्या करें, ब्लैक आउट होने पर क्या करें और अन्य किस-किस तरह से अपनी सुरक्षा की जाए। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ही लोगों को जागरूक करने वाली यह मॉक ड्रिल करने के लिए कहा गया है। आइए जानते हैं मॉक ड्रिल होती क्या है।

"मॉक ड्रिल" एक प्रकार की पूर्वाभ्यास (rehearsal) होती है, जो किसी आपातकालीन स्थिति, प्राकृतिक आपदा, युद्ध, आतंकी हमले या अन्य संकट की स्थिति से निपटने की तैयारी के लिए की जाती है। इसमें वास्तविक जैसी परिस्थितियाँ बनाई जाती हैं, लेकिन असल में कोई खतरा नहीं होता। इसका उद्देश्य होता है कि अधिकारी, सुरक्षा बल, और आम जनता यह जान सकें कि ऐसी स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देनी है।

सायरन कहां बजते हैं
​ज्यादातर हवाई सायरन सरकारी प्रतिष्ठानों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर बजते हैं. सरकारी भवन, प्रशासनिक भवन, फायर स्टेशन, पुलिस हेडक्वार्टर, सैन्य संस्थान, भीड़ भरे बाजार में ये सायरन बजते हैं.

किन जिलों में होगी ड्रिल?
ये मॉक ड्रिल 244 सिविल डिफेंस डिस्ट्रिक्ट (नागरिक सुरक्षा जिला) में होगी. 1962 में आपातकाल की घोषणा तक सरकार की नागरिक सुरक्षा नीति, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नागरिक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता के बारे में जागरूक करने, उन्हें तत्कालीन आपातकालीन राहत संगठन योजना के तहत प्रमुख शहरों और कस्बों के लिए नागरिक सुरक्षा कागजी योजनाएं तैयार रखने के लिए कहने तक ही सीमित थी. इसके बाद नागरिक सुरक्षा अधिनियम 1968, मई 1968 में संसद द्वारा पारित किया गया था.

सिविल डिफेंस एक्ट, 1968 पूरे देश में लागू है. फिर भी संगठन को केवल ऐसे क्षेत्रों और जोनों में स्थापित किया गया है, जिन्हें दुश्मन के हमले के दृष्टिकोण से सामरिक और रणनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है. और उन्हीं 244 जिलों में मॉक ड्रिल कराने की योजना बनी है. ये जिले भारत और पाकिस्तान सीमा से जुड़े हैं, जिसमें जम्मू कश्मीर, राजस्थान, गुजरात, पंजाब जैसे राज्यों के डिस्ट्रिक्ट आते हैं. वहीं, कुछ ऐसे भी संवेदनशील टाउन भी हैं जिन्हें सिविल डिफेंस डिस्ट्रिक्ट के रूप में परिवर्तित किया गया है.

मुख्य बातें 

  1. हवाई हमले के वक्त चेतावनी देने वाले सायरनों को बजाना।
  2. दुश्मन के हमले की स्थिति में नागरिकों, छात्रों आदि को अपनी सुरक्षा के लिए नागरिक सुरक्षा पहलुओं पर ट्रेनिंग देना।
  3. अटैक के वक्त तत्काल ब्लैकआउट (पूरी तरह बत्ती गुल) करने की व्यवस्था करना।
  4. महत्वपूर्ण संयंत्रों और प्रतिष्ठानों के शीघ्र छलावरण (कैमुफ्लॉजिंग) यानी इन्हें किसी दूसरे तरीके से छिपाने की व्यवस्था करना।
  5. इवेक्विशेन प्लान के तहत लोगों से जगह खाली कराने के लिए पहले से ही इसका रिहर्सल करना।