बारह साल पहले हैदराबाद के भीड़भाड़ वाले इलाके दिलसुखनगर की चहल-पहल भरी सड़कें धमाकों की आवाज से गूंज उठी थी। उस दिन की दुखद याद आज भी कई लोगों के जेहन में ताजा हैं। 21 फरवरी, 2013 को इलाके में दोहरे बम विस्फोट में 18 लोगों की मौत हो गई थी और सौ से ज़्यादा लोग घायल हुए थे।
पहला विस्फोट बस स्टॉप पर और दूसरा दिलसुखनगर में एक ढाबे के पास हुआ। इस हमले ने कई परिवारों को ऐसे जख्म दिए जो आज बरसों बाद भी नहीं भर पाए हैं। मंगलवार को तेलंगाना उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को बरकरार रखते हुए पांच दोषियों की मौत की सज़ा को बरकरार रखा। पीड़ित परिवार इस फैसले का बरसों से इंतजार कर रहे थे।
कोणार्क थिएटर के पास जहां विस्फोट हुआ था, वहां पीड़ित परिवार के कुछ लोगों ने मिठाई बांट कर इस फैसले पर खुशी जताई। विस्फोट स्थल से महज कुछ कदम दूर लोकप्रिय ए1 मिर्ची सेंटर के मालिक को वो काला दिन आज भी याद है। उन्होंने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। कोर्ट के फैसले के बाद दिलसुखनगर के लोगों का कहना है कि भले ये फैसला देर से आया है, लेकिन पीड़ितों को इंसाफ मिल गया है।