उत्तर प्रदेश विधानमंडल का आज गुरुवार (30 अप्रैल) को एक विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक पर चर्चा की जाएगी. विशेष सत्र शुरू हो गया है. इस दौरान विधानमंडल के दोनों सदनों- विधानसभा और विधान परिषद- में गरमागरमी देखने को मिलेगी. इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर विशेष चर्चा होगी. सत्ता पक्ष निंदा प्रस्ताव लाएगा, तो वहीं सपा का कहना है कि वो अति निंदा प्रस्ताव लाएंगे.
माना जा रहा है कि विशेष विधानसभा सत्र का मकसद है कि विधायक विधेयक के पारित न हो पाने के परिणामों पर चर्चा कर सकें और महिला सशक्तिकरण पर राज्य सरकार के रुख को फिर से दोहरा जा सकें. जहां बीजेपी ने विपक्षी पार्टियों को 'महिला-विरोधी' करार दिया है. वहीं विपक्ष ने पलटवार करते हुए सरकार पर चुनावी फायदे के लिए महिला आरक्षण के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है.
महिला आरक्षण विधेयक, जिसका उद्देश्य विधायिकाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना है, हाल ही में लोकसभा में पारित नहीं हो सका, जिससे पूरे राजनीतिक हलके में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं. इसके बाद से बीजेपी ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों की आलोचना और तेज कर दी है. पार्टी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए लाए गए एक कदम में बाधा डाली.
इसका उद्देश्य संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना था और इसमें सदन की सदस्य संख्या बढ़ाने के प्रावधान भी शामिल थे. हालांकि, लंबी बहस के बावजूद यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा. अंतिम गणना में विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े. यह संख्याबल विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरत आंकड़े से कम था.