प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज जलियांवाला बाग नरसंहार के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां उन शहीदों की अडिग भावना और बलिदान को हमेशा याद रखेंगी। यह घटना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक काला अध्याय थी, लेकिन उसी ने देश की आज़ादी की लड़ाई को एक नई दिशा दी।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया
हम जलियांवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। आने वाली पीढ़ियाँ उनकी अडिग भावना को हमेशा याद रखेंगी। यह हमारे इतिहास का एक अंधकारमय अध्याय था। उनका बलिदान भारत की स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गया।
जलियांवाला बाग नरसंहार: इतिहास का एक काला दिन
13 अप्रैल 1919 को, बैसाखी के पर्व के दिन, अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग में हज़ारों लोग शांतिपूर्ण सभा कर रहे थे। उस समय ब्रिटिश अधिकारी जनरल डायर ने बिना किसी चेतावनी के भीड़ पर गोलियाँ चलवाना शुरू कर दिया। सैकड़ों निर्दोष लोगों की मौके पर ही मृत्यु हो गई और कई घायल हुए। इस निर्मम हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
यह घटना भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक निर्णायक मोड़ साबित हुई। इस बर्बरता के बाद देशभर में ब्रिटिश शासन के खिलाफ आक्रोश फैल गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की, और यह घटना भारतीयों को एकजुट करने का कारण बनी।
प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलि का महत्व
प्रधानमंत्री द्वारा इस दिन शहीदों को याद करना न केवल हमारे इतिहास के प्रति सम्मान व्यक्त करता है, बल्कि यह नई पीढ़ियों को भी अपने देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है। यह हमें यह भी याद दिलाता है कि स्वतंत्रता हमें कितनी कठिनाइयों और बलिदानों के बाद मिली है। भारत के इतिहास में वीर शहिदों की कुर्बानी की गाथा अनिश्चित काल तक अमर रहेगी।
जलियांवाला बाग शहीदों की कुर्बानी भारत के स्वतंत्रता संग्राम की अमर गाथा है, जिसे हर भारतीय के दिल में हमेशा जीवित रखा जाएगा। जिन्होने अपना पूरा जीवन भारत को गुलामी की जंजीरो से मुक्त कराने मे समर्पित कर दिया।