उच्चतम न्यायालय में गुरुवार को एक जनहित याचिका दायर कर महाकुंभ में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशिष्ट दिशा-निर्देशों और नियमों के कार्यान्वयन की मांग की गई है। प्रयागराज में जारी महाकुंभ के दौरान संगम क्षेत्र में बुधवार सुबह भगदड़ मचने से कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई और 60 घायल हो गए थे।
एक दिन बाद संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर याचिका में भगदड़ की घटनाओं को रोकने और अनुच्छेद 21 के तहत समानता व जीवन के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने की मांग की गई है। याचिका में केंद्र और सभी राज्यों को पक्षकार बनाते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को महाकुंभ में श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक रूप से काम करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ये याचिका दायर की जा रही है जिसमें महाकुंभ में भगदड़ की घटनाओं से बचने के लिए राज्य सरकारों को दिशानिर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत समानता और जीवन के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा आदि सुनिश्चित करने के लिए मूल्यांकन निर्धारित करने और एक स्थिति रिपोर्ट मांगने का अनुरोध किया गया है।
महाकुंभ में भगदड़ के बाद सुरक्षा बढ़ाने के लिए उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई
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