सबरीमाला मंदिर के चर्चित स्वर्ण चोरी मामले के आरोपी और त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी मुरारी बाबू का निधन हो गया है। वह 54 वर्ष के थे और पिछले तीन महीनों से कैंसर का इलाज करा रहे थे। उन्होंने कोच्चि के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। परिवार के अनुसार, कोट्टायम जिले के चंगानाश्शेरी निवासी मुरारी बाबू की तबीयत पिछले कुछ हफ्तों से लगातार खराब चल रही थी। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक आवास पेरुन्ना में किया जाएगा।
मुरारी बाबू का नाम सबरीमाला मंदिर के गर्भगृह के सामने स्थित द्वारपालक मूर्तियों और चौखट पर लगी स्वर्ण परत से जुड़े कथित चोरी मामले में सामने आया था। इस मामले ने केरल में व्यापक चर्चा बटोरी थी। आरोप था कि मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य के दौरान सोने की परत हटाकर उसकी जगह तांबे की परत लगाई गई और इससे जुड़े रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया।
जांच एजेंसियों का दावा था कि इस प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज तैयार करने में मुरारी बाबू की अहम भूमिका थी। इसी मामले में उन्हें 21 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। वह इस जांच में गिरफ्तार होने वाले त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के पहले अधिकारी बने थे। हालांकि, जांच एजेंसी द्वारा कानूनी रूप से निर्धारित 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं किए जाने के कारण कोल्लम विजिलेंस कोर्ट ने उन्हें वैधानिक जमानत दे दी थी।
मुरारी बाबू ने 1997 में त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड में अपनी सेवा शुरू की थी। उन्होंने विभिन्न प्रशासनिक पदों पर काम करते हुए धीरे-धीरे पदोन्नति हासिल की और अंततः सबरीमाला के प्रशासनिक अधिकारी बने। उनके निधन के साथ केरल के सबसे चर्चित मंदिर-संबंधी आपराधिक मामलों में से एक से जुड़ा एक विवादित अध्याय भी समाप्त हो गया। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर अभी और जानकारी का इंतजार है।