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महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच करने की मांग

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महादेव ऑनलाइन बुक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियों की अस्थायी कुर्की को बरकरार रखने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दाखिल की है। ईडी ने इस मामले में दिल्ली के कारोबारी विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों को प्रतिवादी बनाया है। एजेंसी का आरोप है कि इन संपत्तियों का संबंध अपराध से अर्जित धन से है या इन्हें उसी धन से खरीदा गया है।

ईडी के अनुसार, 5 जून 2026 को जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत कुल 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गई हैं। इनमें 893.03 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां और 47.73 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां शामिल हैं। सबसे बड़ी कुर्की Ebix Inc. में 64.20 फीसदी हिस्सेदारी की है, जिसकी कीमत 765.77 करोड़ रुपये बताई गई है। यह हिस्सेदारी Eraaya Lifespaces Ltd. के जरिए रखी गई थी। इसके अलावा ईडी ने Ebix Inc. में 10.66 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी (करीब 127.26 करोड़ रुपये) का भी जिक्र किया है। एजेंसी का कहना है कि इस हिस्सेदारी से जुड़े कथित अपराध की राशि पहले ही खर्च की जा चुकी है, इसलिए इसे अटैच नहीं किया जा सका।

ईडी ने दिल्ली, गोवा, उत्तराखंड, राजस्थान और देहरादून में स्थित कई फ्लैट, मकान और व्यावसायिक संपत्तियां भी कुर्क की हैं। इनमें दिल्ली के द अमैरिलिस, सफदरजंग डेवलपमेंट एरिया, बाबर रोड और शिवाजी मार्ग स्थित संपत्तियां भी शामिल हैं। ईडी का कहना है कि जांच के दौरान उसे विश्वास करने के पर्याप्त आधार मिले हैं कि ये सभी संपत्तियां अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई हैं। इसलिए इन्हें PMLA के तहत कुर्क किया गया है।

जांच के अनुसार, यह मामला छत्तीसगढ़ पुलिस, आंध्र प्रदेश पुलिस, रायपुर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और कोलकाता पुलिस द्वारा दर्ज विभिन्न एफआईआर पर आधारित है। इन मामलों में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल, भ्रष्टाचार और अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी के आरोप लगाए गए हैं।

ईडी का आरोप है कि महादेव ऑनलाइन बुक प्लेटफॉर्म के जरिए अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क चलाया जा रहा था। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बेटिंग आईडी बनाकर लोगों से पैसे लिए और क्रिकेट समेत अन्य खेलों पर सट्टा लगवाया। एजेंसी का यह भी दावा है कि कुछ आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें इस नेटवर्क को चलाने का प्रशिक्षण महादेव ऑनलाइन बुक के कथित सह-संस्थापक सौरभ चंद्राकर और अन्य लोगों ने दिया था। ईडी ने अब न्यायनिर्णायक प्राधिकरण से इन सभी संपत्तियों की अस्थायी कुर्की को अंतिम मंजूरी देने की मांग की है।