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भारत-ओमान संबंधों के 70 साल पूरे

भारत और ओमान सल्तनत के बीच राजनयिक संबंधों को इस साल 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ये एक स्थायी साझेदारी है जो न केवल भूराजनीति पर आधारित है, बल्कि समुदायों को सांस्कृतिक और वाणिज्यक तौर पर भी गहराई से जोड़ती है। हालांकि भारत और ओमान के बीच संबंध दूतावासों और औपचारिक राजनयिक संबंधों से ही नहीं बल्कि बहुत पहले से ही फलते-फूलते रहे हैं। ओमान ने कभी भारतीय रुपये को अपनी आधिकारिक मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किया था, जो दशकों से चले आ रहे मजबूत आर्थिक संबंधों को दिखाता है।

खिमजी रामदास परिवार ओमान में सबसे पुराने भारतीय परिवारों में से एक है। चार पीढ़ियों से वे न केवल व्यापारिक नेता के रूप में बल्कि दो सभ्यताओं के बीच सेतु के रूप में काम करते रहे हैं। उनकी इसी विरासत को सम्मान देते हुए अनिल खिमजी को ओमान में शेख की बड़ी उपाधि से सम्मानित किया गया। आज ओमान में 700,000 से ज़्यादा भारतीय रहते हैं। जो जो ओमान का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। इसके अलावा, ओमान में कई भारतीय मूल के लोग भी रहते हैं जिनके पास ओमान की नागरिकता है।

भारतीय मूल के समुदाय में खान-पान, भाषा से लेकर त्योहारों और रीति-रिवाजों तक, सभी भारतीय प्रभाव यहां रहने वाले लोगों में मिलते हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने 2018 में ओमान की यात्रा की थी और फिर 2023 में सुल्तान हैथम भी भारत आए थे। इस तरह की कई हाई लेवल यात्राओं ने ऊर्जा, व्यापार और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया है। भारत और ओमान राजनयिक संबंधों के 70 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, दोनों देशों की यात्रा सिर्फ़ राजनीति या नीति की कहानी नहीं है - बल्कि ये विश्वास, सहिष्णुता और शाश्वत संबंधों का जीवंत प्रमाण है।