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संत प्रेमानंद से मिले एनकाउंटर स्पेशलिस्ट, हाथ जोड़कर कहा- मन अशांत है, महाराज ने बताया उपाय

महाराज जी! मैं पुलिस में थानाध्यक्ष के पद पर मेरठ में तैनात हूं। मैंने अब तक बहुत एनकाउंटर किए। बदमाशों से मुठभेड़ के दौरान मेरे सीने में गोली लगी। मेरी मृत्यु का समाचार भी जारी हो गया था, प्रभु कृपा से मैं बच गया। अब मेरा मन विचलित रहता है, पश्चाताप क्या होगा?'

ये सवाल मेरठ में तैनात एनकाउंटर स्पेशलिस्ट SSI मुन्नेश सिंह ने संत प्रेमानंद जी महाराज किया। मुनेश अपने परिवार के साथ 10 फरवरी को मथुरा पहुंचे। उन्होंने कहा- मैंने 32 साल इस नौकरी को दिए। मगर अब मन अशांत है। संत प्रेमानंद जी महाराज ने SSI से कहा- थोड़ा समय निकालकर भगवान के चरणों में दें। प्रार्थना करें, हमारी सेवाओं में जो चूक हुई हैं, वो क्षमा हो जाएं। पाप मिले हैं, वो दूर हो जाएं।

संत प्रेमानंद महाराज ने उन्हें क्या रास्ता बताया? प्रभु को वह कैसे पा सकते हैं? पढ़िए...

संत प्रेमानंद महाराज से अपनी बात कहते एनकाउंटर स्पेशलिस्ट मुन्नेश सिंह।

कौन हैं एनकाउंटर स्पेशलिस्ट SSI मुनेश सिंह मुन्नेश सिंह आगरा जिले के छाता इलाके के रहने वाले हैं। मुन्नेश के दो बच्चे हैं। पत्नी बच्चों के साथ गाजियाबाद में रहती हैं। वह पिछले डेढ़ साल से मेरठ में तैनात हैं। मुन्नेश सिंह 2016 में दरोगा बने। मेरठ से पहले गाजियाबाद में तैनात थे। 23 जनवरी 2024 को राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन रात में वह मेरठ में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान बदमाश कार चोरी कर भाग रहे थे।

आपको बता दें मुठभेड़ में एक गोली मुन्नेश के सीने से पार हो गई थी। गाजियाबाद के कौशांबी स्थित मैक्स हॉस्पिटल में ICU में 11 दिन इलाज चला। गाजियाबाद में बदमाश राकेश दुजाना का एनकाउंटर करने वाली टीम में भी शामिल थे। इसके लिए उन्हें 26 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति वीरता पदक भी मिला। मुन्नेश ने 25 एनकाउंटर किए हैं।

मुनेश सिंह के सवाल और प्रेमानंद के जवाब

मुन्नेश - महाराज जी, मैंने बहुत एनकाउंटर किए। मुझे बहुत सम्मान भी मिले। राष्ट्रपति से वीरता पदक मिला। पिछले साल 22 जनवरी को बदमाशों से मुठभेड़ के दौरान मुझे गोली लगी थी। प्रभु की कृपा से मैं बच गया। मगर अब मेरा मन अशांत रहता है, प्रायश्चित कैसे करूं, मैं अपने पद पर ऐसे ही चलता रहूं या प्रभु की शरण में आ जाऊं? 

प्रेमानंद - मनुष्य जीवन का मूल कर्तव्य भगवत प्राप्ति है। सांसारिक धर्म निर्वाह के चक्कर में मूल कर्तव्य से वंचित हो जाए तो ठीक नहीं है। अगर आपका मन आपका साथ दे तो भगवत प्राप्ति के लिए समय निकालिए।

प्रेमानंद- नौकरी में कितना समय दिया? 

मुन्नेश - महाराज जी 32 साल। प्रेमानंद- बहुत समय दिया। कोई नशा तो नहीं करते? 

मुन्नेश- कोई नशा नहीं करता।

कालयवन और भगवान मुचकुंद की कथा का प्रसंग सुनाया संत प्रेमानंद महाराज ने ​कालयवन और भगवान मुचकुंद की कथा का प्रसंग सुनाया। कहा- जब कालयवन के द्वारा भगवान मुचकुंद को कंदरा में ललकार मिली तो भगवान ने उसे अपने पीछे दौड़ाया। भगवान कालयवन को गुफा में ले गए, वहां उसको अपना पीतांबर ओढ़ाया।

कहा कि तुम इस जन्म में मुझे प्राप्त नहीं कर सकते। क्योंकि तुमने बहुत से वध किए हैं, शिकार आदि में पशुओं और युद्ध आदि में इंसानों के, इसलिए तुम इस रूप में मुझे प्राप्त नहीं कर सकते। तुम्हें एक जन्म और लेना पड़ेगा और अब तुम ब्रहमऋषि कुल में जन्म लोगे और भक्ति कर मुझे प्राप्त करोगे।

अब भगवान के चरणों में समय दो स्वामी प्रेमानंद जी ने मुन्नेश सिंह से कहा- अब थोड़ा समय निकालकर भगवान के चरणों में दें, ताकि हमारी सेवाओं में जो चूक हुई हैं, वो क्षमा हो जाएं, पाप मिले हैं वो दूर हो जाएं। अगला जन्म भी मिले तो हम देशभक्त बनें, भगवान के भक्त बनें।

हम अब इसके नीचे न जाएं, मनुष्य योनि के नीचे न जाएं, अन्य योनियों के नीचे न जाएं। आधा जीवन तो आपने दे ही दिया भारत को अब भगवान को दे दीजिए। अपने समाज में रहकर आप रिटायर भी रहेंगे तो जिसकी प्रवृत्ति अच्छी होती है। वो समाज में भी अपना अच्छा वातावरण फैलाता है।

युवाओं के मार्गदर्शक बनो प्रेमानंद महाराज ने कहा- नए लड़के जो फोर्स में जाने वाले हैं, उनको गाइड करें। उनको तैयार करें, रिटायर होकर भी आप भारत सरकार की सेवा कर सकते हैं। अब जो जीवन बचा है उसे भगवान को दे दो, अब जीवन को अखिल कोटि ब्रह्मांड सरकार के चरणों में लगा दो।

मुन्नेश बोले- बिना आपको सुने नींद नहीं आती

मुन्नेश सिंह ने कहा- मैं रात को भी ड्यूटी से आकर आपको देर रात तक सुनता हूं। चाहे रात में 11-12 बजे कभी भी ड्यूटी से लौटूं। आपकी बातों को जरूर सुनता ही हूं। जब मैं 11 दिन अस्पताल में रहा, तब भी आपको सुनता रहा, आपको सुने बिना नींद नहीं आती।

ये तस्वीर मुन्नेश की उस समय की है, जब गोली लगने के बाद उनका अस्पताल में उपचार चल रहा था।

जान बचने के बाद और बढ़ गया भरोसा मुन्नेश ने बताया- बेटे अंकित और भतीजे सौरभ के साथ संत प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन किए। लगभग 1 से सवा घंटे तक वहां रहे। कहा- जब सीने में गोली लगी थी और मैं अस्पताल में जिदंगी और मौत से जूझ रहा था। तब मुझे महसूस हुआ कि कोई अद्श्य शक्ति मेरे साथ है। जो मेरी सुरक्षा कर रही है।

वो प्रेमानंद जी का साथ था। उसके बाद उनमें आस्था और बढ़ गई, उनको नियमित सुनता हूं और फॉलो करता हूं। उनसे मिलकर मन को बहुत शांति मिली है। प्रेमानंद महाराज ने मुझे शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। एकांत में संवाद भी किया। इस संवाद में पहले महाराज जी का सत्संग सुना, आधे घंटे राधारानी की कथा सुनी। महाराज जी के आदर्शों पर चलूंगा प्रेमानंद महाराज को सुनकर अच्छी प्रेरणा मिलती है। अब यह प्रयास करता हूं कि मेरी वजह से किसी को दुख न मिले। मुझसे कोई गलत काम न हो जाए। जब से जान बची है, तब से मैं अब इसी को फालो करता हूं। सही बात को सही कहने की हिम्मत रखता हूं, ये सब मैंने प्रेमानंद महाराज की शिक्षा से सीखा है।

जिसके बाद महाराज जी ने कहा है कि भारत की सेवा कर ली। भगवान की सेवा करो। अब इस पर विचार करुंगा। अभी तो कर्तव्य का पालन करते हुए संत महाराज के आदर्शों पर चलूंगा।