देश में जनगणना और आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर मंथन तेज हो गया है। सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों में समय से पहले विधानसभा चुनाव कराए जाने की संभावनाओं पर चर्चा चल रही है। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से अभी तक किसी भी संभावित चुनाव कार्यक्रम को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
बताया जा रहा है कि चुनाव कार्यक्रम और जनगणना की गतिविधियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए विभिन्न प्रशासनिक विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। यदि दोनों प्रक्रियाएं एक ही समयावधि में चलती हैं तो अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्यभार काफी बढ़ सकता है। इसी वजह से चुनाव आयोग विभिन्न राज्यों की परिस्थितियों और प्रशासनिक आवश्यकताओं का अध्ययन कर रहा है। जनगणना जैसे बड़े राष्ट्रीय अभियान और चुनावी प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की जरूरत होती है, जिससे संसाधनों के प्रबंधन की चुनौती बढ़ सकती है।
इसके अलावा जनगणना पूरी होने के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाएं तय करने की प्रक्रिया (परिसीमन) भी की जानी है। इसी वजह से चुनाव और जनगणना के कार्यक्रमों को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चा चल रही है। समय से पहले विधानसभा चुनाव होने की अटकलों के बाद राजनीतिक दलों की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने अभी तक चुनाव की तारीखों या किसी संभावित कार्यक्रम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। फिलहाल सरकार और संबंधित विभाग चुनाव तथा जनगणना दोनों कामों को सुचारु रूप से पूरा कराने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, ताकि अधिकारियों और कर्मचारियों पर अधिक दबाव न पड़े।