दिल्ली पुलिस की साउथ-वेस्ट जिला साइबर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में नाइजीरियाई नागरिक समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने विदेशी पार्सल में अमेरिकी डॉलर और सोना होने का झांसा देकर एक व्यक्ति से 1.46 लाख रुपये की ठगी की। पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल किए गए 7 मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। आरोपियों को दिल्ली, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के मुताबिक, 31 मार्च 2026 को साउथ-वेस्ट जिले के साइबर थाने में शिकायत मिली थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि कुछ अज्ञात लोगों ने उससे WhatsApp चैट और फोन कॉल के जरिए संपर्क किया और खुद को अमेरिका का रहने वाला बताया। आरोपियों ने पहले उससे दोस्ती कर उसका भरोसा जीता। इसके बाद उन्होंने दावा किया कि उसके नाम पर भारत में एक पार्सल भेजा गया है, जिसमें अमेरिकी डॉलर और सोना है।
इसके बाद आरोपियों ने अलग-अलग बहाने बनाकर उससे पैसे ट्रांसफर करवाए। इनमें मनी डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट, फ्लाइट टिकट, कस्टम क्लियरेंस और जब्त किए गए सोने को छुड़ाने के नाम पर पैसे मांगे गए। आरोपियों की बातों पर भरोसा करके पीड़ित ने अलग-अलग UPI आईडी और बैंक खातों में कुल 1.46 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
मामले में ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। साउथ-वेस्ट के एडिशनल DCP कुमार अभिषेक ने बताया कि तकनीकी जांच, डिजिटल सबूतों की जांच और पैसों के लेन-देन की पड़ताल के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। दीपक कुमार को दिल्ली के मैदान गढ़ी से गिरफ्तार किया गया और उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। इसके बाद कोंडा सागर को तेलंगाना के जयशंकर भूपालपल्ली जिले से गिरफ्तार किया गया।
एक अन्य आरोपी अजीमीरा विनोद कुमार को तेलंगाना के दुब्बापेटा से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से दो मोबाइल फोन बरामद हुए। जांच में विशाखापत्तनम में रहने वाले सिमोन मिरेकल चिनोंसो, जो नाइजीरियाई नागरिक है, की भूमिका भी सामने आई। पुलिस टीम ने छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया और उसके पास से चार मोबाइल फोन बरामद किए।
पुलिस के अनुसार, दीपक कुमार, कोंडा सागर और अजीमीरा विनोद कुमार कथित तौर पर साइबर ठगों को कमीशन के बदले बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। वहीं, नाइजीरियाई आरोपी सिमोन मिरेकल चिनोंसो कथित तौर पर इमिग्रेशन अधिकारी, कस्टम अधिकारी और अन्य विभागों के कर्मचारी बनकर WhatsApp चैट और फोन कॉल करता था। वह विदेशी पार्सल, कस्टम क्लियरेंस, दस्तावेज और कीमती सामान छुड़ाने जैसी झूठी कहानियां बनाकर लोगों से पैसे ट्रांसफर करवाता था। पुलिस का कहना है कि ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था, ताकि पैसों के असली स्रोत को छिपाया जा सके और उसे आगे ट्रांसफर किया जा सके। मामले में आगे की जांच जारी है।