40 साल की उम्र में किए अपराध के बाद सुरेंद्र महतो पूरी जिंदगी पुलिस से बचने के लिए भागता रहा। दो दशक तो इस रेस में वह आगे रहा लेकिन बुढ़ापे में कदम रखते ही कानून के लंबे हाथ सुरेंद्र को दबोचने में कामयाब हो गए। इन 21 वर्षों में भी उसे कहीं चैन नहीं मिला। वह भटकता रहा। इस दौरान वह परिवार से तो दूर रहा ही उसका बेटा भी सार्वजनिक रूप से उसे पिता नहीं कह सका।
शनिवार को जब पुलिस ने देवरिया के ग्राम महुवा पहुंची तो सुरेंद्र महतो एकबारगी भौचक्का रह गया। पुलिस को बताया कि करीब 40 साल की आयु में उसने छोटे भाई के कहने पर बालिका को बिहार भगा ले जाने की गलती की थी। छोटे लाल तो पकड़ा गया लेकिन वो पुलिस से बचने के लिए झारखंड पहुंच गया।