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New Delhi: जानलेवा गर्मी से राहत के उपायों पर चर्चा, हैबिटैट सेंटर में 'इंडिया हीट समिट 2026' का आयोजन

New Delhi: भारत में गर्मी सिर्फ एक मौसम नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। साल दर साल ये समस्या गंभीर होती जा रही है। इस साल भी देश के कई हिस्से लगातार भीषण गर्मी की चपेट में हैं। गर्मी में होने वाली परेशानियां अब देश भर में गंभीर चर्चा का विषय बन गई हैं।

नई दिल्ली के हैबिटैट सेंटर में ऐसा ही एक आयोजन किया गया। नाम था, इंडिया हीट समिट 2026 आयोजन में जानकारों ने गर्मी की समस्याओं पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का आयोजन 'क्लाइमेट ट्रेंड्स' ने बुधवार को किया था। इस दौरान एक नए शोध का विमोचन किया गया, जो चेन्नई के पचास रिहायशी शहरी इलाकों पर आधारित था।

शोध में बताया गया कि घरों के अंदर का तापमान अक्सर 32 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है। सबसे ज्यादा प्रभावित घरों में साल के आठ महीने इतना ही तापमान रहता है। जानकारों का कहना है कि भीषण गर्मी का बोझ हर किसी पर समान रूप से नहीं पड़ता। उनका कहना है कि गर्मी एक मानवाधिकार समस्या भी है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले मजदूर, बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाएं हैं। इनपर गर्मी का असर सबसे ज्यादा पड़ता है।

उनके अधिकारों की रक्षा करने वाली नीतियां आंकड़ों की निगरानी और उनके मूल्यांकन से शुरू होती हैं और राष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों के दायरे में आती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन ने भी योजनाएं बनाई हैं। ये योजनाएं तीन सौ से ज्यादा शहरों और कस्बों को कवर कर रही हैं। योजनाओं का प्रारूप संघीय है। राज्य योजनाओं को लागू करने के लिए राष्ट्रीय निकायों से सलाह मशविरा करती हैं।

इस साल मौसम के असामान्य पैटर्न से अस्थायी राहत मिली है। इससे देश के बड़े हिस्से में लू काबू में है। लेकिन मौसम के जानकारों का कहना है कि इसे लंबी अवधि के स्थायी उपाय के रूप में नहीं देखा जा सकता है।

शोध करने वालों का कहना है कि समस्या का हल पहले से मौजूद है। कुछ पारंपरिक वास्तुकला में, कुछ उन्नत तकनीक में और कुछ मजबूत नीतियां लागू करके। वे पूछते हैं कि क्या हमारा देश गर्मी के विज्ञान को शासन प्रणालियों से जोड़ने और अधिकारों की फौरन जमीनी हकीकत से जोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है?