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ईडी ने केजरीवाल को भेजा सातवां समन, 26 फरवरी को पेश होने को कहा

New Delhi: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नया समन जारी कर उनसे पूछताछ के लिए 26 फरवरी को पेश होने को कहा है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियिम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत सातवां समन जारी करते हुए केजरीवाल की इस दलील को खारिज कर दिया कि उनकी पेशी के लिए नया नोटिस देना गलत है क्योंकि ये मामला लोकल अदालत के विचाराधीन है। 

सूत्रों ने बताया कि केजरीवाल को आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 26 फरवरी को उसके सामने पेश होने और अपना बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया है। ईडी ने हाल में इस मामले में उसके समन को न मानने के लिए आम आदमी पार्टी (एएपी) के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल के खिलाफ एक नयी शिकायत दर्ज करायी थी। अदालत ने पिछले हफ्ते केजरीवाल को इस मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश होने की छूट दी थी और मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की थी। 

अदालत ने ये भी कहा था कि शिकायत के विषय और रिकॉर्ड पर रखे गए मेटीरियल से, प्राइमा फेसी ये भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 174 के तहत अपराध बनता है और आरोपी अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कार्रवाई के लिए काफी हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक ईडी ने दावा किया कि लोकल अदालत ने प्राइमा फेसी केजरीवाल को इस मामले में पूर्व में जारी नोटिसों की 'अवज्ञा' करने का दोषी पाया है, जिसके कारण उन्हें सातवां समन जारी करने की जरूरत पड़ी है। 

सूत्रों ने बताया था कि अदालत के सामने सवाल समन की वैधता का नहीं बल्कि केजरीवाल की तरफ से जानबूझकर पहले जारी समन की अवज्ञा करने का गैरकानूनी काम है। ईडी ने इस मामले में दाखिल किए आरोपपत्रों में कई बार केजरीवाल के नाम का जिक्र किया है। एजेंसी ने कहा कि आरोपित अब रद्द की जा चुकी दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 को तैयार करने के संबंध में उनके संपर्क में थे। 

ईडी अब तक इस मामले में एएपी नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के अलावा पार्टी के संचार प्रभारी विजय नायर को गिरफ्तार कर चुकी है। ईडी ने अपने आरोपपत्र में दावा किया कि एएपी ने ‘‘अपराध से मिली करीब 45 करोड़ रुपये की आय’’ का इस्तेमाल गोवा चुनाव प्रचार अभियान में किया।