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निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन की आड़ में रोजी-रोटी और हिंदू त्योहारों को निशाना बनाया जा रहा:विहिप

नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने शनिवार को आरोप लगाया कि राजधानी में निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शनों की आड़ में कारोबार बाधित करने, मजदूरों को दिहाड़ी से वंचित करने और रेहड़ी-पटरी वालों, ऑटो चालकों तथा अन्य कामगारों की आजीविका छीनने की साजिश की जा रही है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन ने कहा कि प्रदर्शनकारी लड़ाई किसी एक पक्ष से लड़ रहे हैं, लेकिन निशाना दूसरों को बना रहे हैं। उसने दावा किया कि त्योहारों के दौरान इन प्रदर्शनों से व्यापारियों और कामगारों पर असर पड़ रहा है।

ये टिप्पणियां मध्य दिल्ली में पिछले एक सप्ताह से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के बीच आई हैं। इनमें शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम भी शामिल है।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कथित धरने-प्रदर्शनों के नाम पर व्यापारियों से व्यापार, मजदूरों से उनकी दिहाड़ी, रेहड़ी-पटरी वालों, ऑटो चालकों और छोटे मंझोले काम करने वाले कामगारों के काम को रोकने और छीनने के नए-नए षड्यंत्र किया जा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में त्योहारों का विशेष महत्व है क्योंकि त्योहार हर्ष-उल्लास, धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व आर्थिक समृद्धि के साथ समरसता, बंधुत्व और प्रेम को बढ़ाने में बहुत बड़ा योगदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि हिंदू और अन्य व्यापारियों की आजीविका के साथ-साथ त्योहार की खुशियां भी छीनी जा रही हैं।

बंसल ने कहा, ‘‘सब जानते हैं कि देश की राजधानी का एक छोटा सा हिस्सा संपूर्ण भारत के व्यापारियों और अन्य खरीदारों के लिए बहुत बड़ा व्यापारिक केंद्र है। जिन बाजारों में गत वर्षों में इन दिनों पैर रखने की जगह नहीं होती थी, वे इस समय सुनसान पड़े हैं।’’

विरोध-प्रदर्शन के समय को लेकर सवाल उठाते हुए बंसल ने पूछा, ‘‘आखिर इस प्रकार के प्रदर्शन कभी मुहर्रम, ईद, क्रिसमस या अन्य गैर हिंदू त्योहारों के दिन क्यों नहीं होते? ये हिंदू विरोधी तत्व हिंदू त्योहार आते ही क्यों सक्रिय हो जाते हैं? अब यह सिलसिला थमना चाहिए और राजनीतिक दलों को भी यह समझना चाहिए कि जनता को दबाकर उनके राजनैतिक हित भी आखिर कब तक सुरक्षित रह पाएंगे।’’

भाषा

शफीक अविनाश

अविनाश