नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (भाषा) आयुष मंत्रालय ने शनिवार को रजोनिवृत्ति (मासिक धर्म बंद हो जाने) के दौरान महिलाओं के लिए जागरूकता, निवारक देखभाल और व्यापक स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व पर जोर दिया।
विश्व रजोनिवृत्ति दिवस 2026 के अवसर पर मंत्रालय ने रजोनिवृत्ति से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर अनुसंधान को बढ़ावा देने और उनकी बेहतर समझ विकसित करने के प्रयासों को रेखांकित किया।
मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) के माध्यम से मंत्रालय रजोनिवृत्ति के स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं की बेहतर समझ विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसमें शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य तथा जीवन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
रजोनिवृत्ति एक प्राकृतिक जैविक अवस्था है। इसमें अंडाशय में अंडाणु विकसित करने वाली फॉलिकल गतिविधि समाप्त होने के बाद मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है। यह आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की आयु के बीच होता है।
रजोनिवृत्ति की ओर बढ़ने के दौरान महिलाओं को कई तरह के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक बदलावों का सामना करना पड़ सकता है, जिनमें अनियमित मासिक धर्म, अचानक गर्मी महसूस होना, योनि में सूखापन, नींद में परेशानी, मनोदशा में बदलाव, जोड़ों में दर्द और चिंता व बेचैनी शामिल हैं।
बयान में कहा गया है कि आयुर्वेद में इस अवस्था से जुड़े लक्षणों पर ‘रजोनिवृत्ति’ और उससे संबंधित चिकित्सकीय लक्षणों के संदर्भ में चर्चा की गई है। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि इन लक्षणों की पहचान और उनका उचित प्रबंधन महिलाओं के स्वास्थ्य तथा कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, रजोनिवृत्ति की ओर बढ़ने की प्रक्रिया धीरे-धीरे हो सकती है और आमतौर पर मासिक धर्म चक्र में बदलाव से शुरू होती है।
‘पेरिमेनोपॉज’ उस अवधि को कहा जाता है, जब रजोनिवृत्ति के शुरुआती संकेत दिखाई देने लगते हैं। यह अवधि अंतिम मासिक धर्म के एक साल बाद तक रहती है। यह प्रक्रिया कई वर्षों तक चल सकती है और महिला के शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक तथा सामाजिक कल्याण को प्रभावित कर सकती है।
बयान में कहा गया है कि हार्मोनल और गैर-हार्मोनल, दोनों तरह के उपचारों से पेरिमेनोपॉज के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य पर जीवन के हर चरण में लगातार ध्यान देने की जरूरत है। इसमें रजोनिवृत्ति की ओर बढ़ने की अवस्था भी शामिल है।
उन्होंने कहा, ‘‘आयुर्वेद एक व्यापक ढांचा प्रस्तुत करता है, जिसमें रोकथाम, जीवनशैली से जुड़ी उचित आदतों और व्यक्ति की जरूरत के अनुरूप देखभाल पर जोर दिया जाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आयुष मंत्रालय इस क्षेत्र में अनुसंधान और वैज्ञानिक प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, महिलाओं के स्वास्थ्य और उनके कल्याण तथा जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने वाले उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।’’
सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रोफेसर रबिनारायण आचार्य ने कहा कि आयुर्वेद रजोनिवृत्ति को किसी विकार के बजाय एक प्राकृतिक परिवर्तन के रूप में देखता है।
उन्होंने कहा कि रसायन चिकित्सा, खानपान संबंधी मार्गदर्शन और मानसिक कल्याण से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से महिलाएं इस अवस्था से संतुलन और सहजता के साथ गुजर सकती हैं।
मंत्रालय ने कहा कि विश्व रजोनिवृत्ति दिवस 2026 के अवसर पर महिलाओं को इस अवस्था से आत्मविश्वास के साथ गुजरने और अपने स्वास्थ्य तथा कल्याण को बनाए रखने में मदद करने के लिए अधिक जागरूकता, खुलकर बातचीत और समय पर उचित देखभाल की जरूरत पर जोर दिया गया।
भाषा गोला रंजन
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