Breaking News

मुंबई के कुर्ला में 13 मंजिला इमारत में लगी आग, 3 बच्चों समेत 9 लोग घायल     |   यूक्रेन: कीव में रूसी हवाई हमले में 3 लोगों की मौत, 6 घायल     |   कोलंबिया में सोने की खदान ढही, 6 मजदूरों की मौत; 12 से 15 लापता     |   टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के बाद बरेली में दिशा पाटनी के घर की सुरक्षा बढ़ाई गई     |  

राजस्थान की सांभर झील में बड़ी संख्या में फ्लेमिंगो के घोंसले मिलने का दावा

जयपुर, 17 अक्टूबर (भाषा) राजस्थान की सांभर झील के सूखते तल में बड़ी संख्या में फ्लेमिंगो (राजहंस) के घोंसले मिलने से वन्यजीव प्रेमियों में नई उम्मीद जगी है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि इन प्रवासी पक्षियों के लिए गुजरात के 'कच्छ के रण' के बाहर यह झील भी सफल प्रजनन स्थल के रूप में उभर सकती है।

एक वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ता ने दावा किया है कि उन्होंने इस जगह पर पहली बार फ्लेमिंगो के चूजों के अंडे से बाहर निकलने के दस्तावेजी सबूत जुटाए हैं।

वन्यजीव फोटोग्राफर और वन्यजीव संरक्षणकर्ता गौरव दाधीच ने बताया कि उन्होंने अगस्त में इस झील में सफल प्रजनन के सबूत दर्ज किए। उस समय, झील के ऐसे हिस्से में मिट्टी से बने 4,000 से अधिक घोंसले (मिट्टी के छोटे छोटे टीले) मिले जो आमतौर पर पानी में डूबा रहता है।

उन्होंने कहा, 'यह खोज बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब तक गुजरात का 'कच्छ का रण' ही भारत में फ्लेमिंगो का मुख्य प्रजनन स्थल माना जाता रहा है।

सांभर झील को मुख्य रूप से उनके खाने और आराम करने की जगह माना जाता था।

सांभर देश की सबसे महत्वपूर्ण खारे पानी की आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) में से एक है। हालांकि, वैज्ञानिक दस्तावेजों के जरिए अभी तक आधिकारिक तौर पर यह साबित नहीं हुआ है कि सांभर में फ्लेमिंगो का प्रजनन होता है।

दाधीच के अनुसार इस घोंसला कॉलोनी में 'लेसर फ्लेमिंगो' के लगभग 3,000 से 3,500 घोंसले और 'ग्रेटर फ्लेमिंगो' के करीब 500 घोंसले शामिल थे।

दाधीच ने बताया कि उन्होंने 230 से अधिक फ्लेमिंगो (जिनमें चूजे भी शामिल थे) के सफल प्रजनन के सबूत देखे और इस पूरी प्रक्रिया को एक डॉक्यूमेंट्री के लिए रिकॉर्ड किया।

दाधीच ने कहा, 'सांभर में फ्लेमिंगो को कई साल से घोंसले बनाते देखा गया है, लेकिन कभी भी यह पक्के तौर पर साबित नहीं हो पाया था कि यहां सफल प्रजनन भी होता है। अगस्त में, मैंने यहां सफल घोंसला बनाने और प्रजनन की प्रक्रिया को रिकॉर्ड किया।'

उन्होंने बताया कि वह अपने इस अनुभव पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इस साल कम बारिश होने के कारण झील के जलस्तर में काफी बदलाव आया है।

पिछले साल भारी बारिश से सांभर झील का एक बड़ा हिस्सा पानी से भर गया था, जिससे बड़ी संख्या में प्रवासी फ्लेमिंगो यहां आकर्षित हुए थे। इस साल, पानी का स्तर कम होने से झील के तल का एक बड़ा हिस्सा दिखने लगा है जिसमें मिट्टी से बनी 'शंकु' के आकार की हज़ारों संरचनाएं दिखाई दे रही हैं।

दाधीच ने बताया कि ये घोंसले ऐसी जगह पर बनाए गए थे जहाँ लोगों का आना-जाना बहुत कम होता है। कई संरचनाओं पर अंडों के छिलके मिले हैं, जिससे पता चलता है कि वहाँ अंडे दिए गए थे।

फ्लेमिंगो अपने घोंसले बनाने के लिए जगह का चुनाव बहुत सावधानी से करते हैं। वे मिट्टी की स्थिति, पानी रुकने की क्षमता और अपने बच्चों के लिए भोजन की उपलब्धता जैसी बातों का ध्यान रखते हैं। दाधीच के अनुसार, इन बातों से पता चलता है कि सांभर झील फ्लेमिंगो के लिए केवल भोजन करने की मौसमी जगह ही नहीं, बल्कि प्रजनन के लिए भी एक उपयुक्त स्थान है।

वन अधिकारी राहुल झांझड़िया ने बताया कि कम बारिश के कारण झील में पानी का स्तर काफी गिर गया है और इस समय यहाँ आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या भी सामान्य से कम है।

उन्होंने कहा कि वन विभाग ने प्रवासी पक्षियों के मौसम के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसमें पिछले कुछ वर्षों में झील में पक्षियों में होने वाले संक्रमण 'बोटुलिज़्म' को दोबारा फैलने से रोकने के उपाय भी शामिल हैं।

आठ अक्टूबर को सांभर में बैठक में नगर पालिका, झील का संचालन करने वाली कंपनी 'सांभर साल्ट्स', बिजली विभाग और पशुपालन विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए।

इन तैयारियों के हिस्से के रूप में एक जागरूकता कार्यशाला भी आयोजित की गई।

झांझड़िया ने बताया कि झील में आने वाली प्रवासी पक्षियों की प्रजातियों की पहचान करने और उन पर नज़र रखने के लिए, अक्टूबर से फरवरी तक हर महीने पक्षियों की गणना कराने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि वन विभाग प्रवासी मौसम के दौरान निगरानी बढ़ाएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि पक्षियों को देखने (बर्डवॉचिंग) या पर्यटन गतिविधियों से पक्षियों को कोई परेशानी न हो और उनके प्राकृतिक आवास को कोई नुकसान न पहुंचे।

भाषा पृथ्वी जोहेब

जोहेब