इंदौर (मध्यप्रदेश), 17 अक्टूबर (भाषा) देश के कई सोयाबीन उत्पादक क्षेत्रों में मानसून के दौरान बारिश की कमी और सूखे जैसे हालात के बावजूद प्रसंस्करणकर्ताओं के एक संगठन ने शनिवार को कहा कि खरीफ के मौजूदा सत्र में इस तिलहन फसल का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले दो प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ लगभग 108 लाख टन रह सकता है।
यह अनुमान सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के इंदौर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सोयाबीन सम्मेलन के समापन सत्र में जाहिर किया गया।
सोपा की प्रथम फसल अनुमान रिपोर्ट के अनुसार इस बार मध्यप्रदेश और राजस्थान में सोयाबीन उत्पादन बढ़ने से महाराष्ट्र में फसल को हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई होने की संभावना है।
सोपा के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया,‘‘मध्यप्रदेश में सोयाबीन की पैदावार इस बार बढ़िया रही है। राजस्थान में भी उपज अच्छी रही है।’’
उन्होंने कहा,‘‘दोनों राज्यों में उत्पादन बढ़ने से महाराष्ट्र में हुए नुकसान की लगभग भरपाई हो गई है। इसके अलावा, इस बार सोयाबीन की बुवाई का राष्ट्रीय रकबा पिछले सत्र के मुकाबले करीब पांच लाख हेक्टेयर ज्यादा रहा।’’
सोपा के अनुमान के अनुसार देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक मध्यप्रदेश में इस तिलहन फसल की पैदावार 57.16 लाख टन रहने का अनुमान है जो पिछले साल के 43.24 लाख टन से 32.2 प्रतिशत अधिक है।
राज्य में सोयाबीन की बुवाई का रकबा पिछले साल के 48.64 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस साल 52.09 लाख हेक्टेयर हो गया। वहीं, प्रति हेक्टेयर औसत उपज 889 किलोग्राम से बढ़कर 1,108 किलोग्राम रहने का अनुमान है।
महाराष्ट्र में सोयाबीन उत्पादन 33.2 प्रतिशत घटकर 34.88 लाख टन रहने का अनुमान है। वहीं, राजस्थान में इस तिलहन फसल की पैदावार 48.2 प्रतिशत बढ़कर 9.47 लाख टन रहने की संभावना है।
सोपा के अनुसार वर्ष 2025 के खरीफ सत्र में देश में 112.14 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी की गई थी जिसमें 983 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की औसत पैदावार के साथ कुल 110.26 लाख टन उत्पादन दर्ज किया गया था।
खरीफ के मौजूदा सत्र में सोयाबीन की बुवाई का कुल रकबा लगभग पांच प्रतिशत बढ़कर 117.73 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, लेकिन नमी की कमी और सूखे के कारण 7.76 लाख हेक्टेयर में फसल प्रभावित हुई, नतीजतन कटाई का वास्तविक रकबा घट कर 109.98 लाख हेक्टेयर रह गया।
कटाई वाले क्षेत्र में 981 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की औसत उत्पादकता के साथ इस बार कुल सोयाबीन उत्पादन 107.93 लाख टन रहने का अनुमान है जो बीते वर्ष की तुलना में 2.11 प्रतिशत कम है।
सोपा के अनुमान के मुताबिक महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना में लंबे समय तक बारिश नहीं होने तथा फसल की वृद्धि के महत्वपूर्ण चरणों में नमी की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ।
इन तीनों राज्यों में कुल 7.02 लाख हेक्टेयर में बोई गई सोयाबीन की फसल पूरी तरह नष्ट हो जाने के कारण उसकी कटाई नहीं हो सकी।
भाषा हर्ष जोहेब पाण्डेय
पाण्डेय