नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (भाषा) भोपाल गैस त्रासदी की झकझोर देने वाली तस्वीरों और कटे हुए मानव सिर को हाथ में लिए एक पुलिसकर्मी के भयावह दृश्य से लेकर हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत नजारों को पेश करती पत्रकार बिनू के. जॉन की नयी पुस्तक फोटोग्राफी के व्यापक दायरे को समेटती है।
यह पुस्तक एक सदी से भी अधिक समय के दौरान हिंसक घटनाओं और खूबसूरत दृश्यों को समान गंभीरता से दर्ज करती है।
नियोगी बुक्स द्वारा प्रकाशित ‘ऑल इन अ फ्लैश : न्यूज फोटोग्राफी इन इंडिया’ में जॉन ने उन तस्वीरों को संकलित किया है, जो देश की सामूहिक दृश्य स्मृति का हिस्सा बन चुकी हैं। इनमें कुछ चर्चित और कुछ ऐसे फोटोग्राफरों की तस्वीरें शामिल हैं, जिन्हें अधिक पहचान नहीं मिली।
पुस्तक की शुरुआत ‘द डेड एंड द डाइंग’ नाम के अध्याय से होती है, जिसमें कुछ घटनाओं और निडर फोटोग्राफरों द्वारा खींची गई तस्वीरों को शामिल किया गया है।
इस अध्याय की शुरुआत ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के वीरेंद्र सिंह की खींची उस तस्वीर से होती है, जिसमें 1993 में दिल्ली स्थित भारतीय युवा कांग्रेस कार्यालय में हुए विस्फोट के बाद एक पुलिसकर्मी कटा हुआ सिर लेकर जा रहा है। यह तस्वीर पुस्तक के मुखपृष्ठ पर भी है।
इस अध्याय में भारतीय इतिहास की कुछ अन्य प्रमुख घटनाओं की यादें भी ताजा की गई हैं। इनमें 1996 में चरखी दादरी के ऊपर सऊदी अरब और कजाख्स्तान के विमानों के बीच हवा में हुई टक्कर के बाद का दृश्य, 1987 का हाशिमपुरा नरसंहार और 1984 में पंजाब में खालिस्तान आंदोलन शामिल हैं।
हाल के इतिहास की एक अन्य महत्वपूर्ण घटना को दर्ज करते हुए जॉन ने इस अध्याय का एक हिस्सा कोविड-19 महामारी को समर्पित किया है। इसमें मई 2020 में दिल्ली के निजामुद्दीन पुल पर एक बेसहारा प्रवासी मजदूर की तस्वीर शामिल है, जिसे प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के अतुल यादव ने खींचा था।
कान पर मोबाइल फोन लगाए उस व्यक्ति का दुख से भरा चेहरा दुनिया भर में तबाही मचाने वाली एक ऐसी बीमारी के बीच लाखों भारतीयों के सामूहिक दुख का प्रतीक बन गया था, जिसके बारे में पहले किसी को जानकारी नहीं थी।
भाषा शफीक अविनाश
अविनाश