नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) उत्तर दिल्ली में बुराड़ी के निकट यमुना किनारे संभवतः हजारों मछलियां मृत पाई गईं हैं, जिससे नदी के पानी की गुणवत्ता और उसके जलीय पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों ने इसके लिए प्रदूषण और नदी में पर्यावरणीय जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त जल प्रवाह नहीं होने जैसे कारणों की आशंका जताई है।
बुधवार शाम को मछलियों की मौत होने की घटना सामने आई थी, लेकिन मौत का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग के प्रमुख राधेश्याम शर्मा ने कहा कि हजारों मछलियों की अचानक से मौत होना पानी में प्रदूषक तत्वों की मात्रा में तेज वृद्धि का संकेत हो सकता है। उन्होंने पानी में जहरीला अपशिष्ट छोड़े जाने की आशंका जताई है।
उन्होंने कहा, ‘‘मछलियों की अचानक बड़े पैमाने पर मौत होने से पानी में किसी प्रदूषक तत्व की मात्रा में अचानक वृद्धि या किसी तरह के जहरीले अपशिष्ट के छोड़े जाने का संकेत मिलता है। मछलियां जैविक संकेतक होती हैं और उनकी मौत पारिस्थितिक असंतुलन को दर्शाती है।’’
शर्मा ने आगाह किया कि ऐसे प्रदूषक तत्व भूजल में भी पहुंच सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अपशिष्ट जल की अपेक्षाकृत कम मात्रा भी जलीय जीवों को नुकसान पहुंचा सकती है, यदि उसमें प्रदूषक तत्वों की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक हो। इससे मछलियों में प्रजनन संबंधी समस्याएं और शारीरिक बनावट में असामान्य बदलाव हो सकते हैं।
‘साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम, रिवर्स एंड पीपुल’ (एनएएनडीआरपी) के सह-संयोजक भीम सिंह रावत ने कहा कि वजीराबाद के ऊपर यमुना के अपेक्षाकृत साफ हिस्से में बार-बार बड़ी संख्या में मछलियों का मरना चिंता का विषय है, खासकर इसलिए, क्योंकि मछलियों के मरने की यह घटना मानसून के बाद हुई है।
रावत ने, हालांकि कहा कि संबंधित एजेंसियों की गहन जांच से ही मछलियों की मौत होने के सटीक कारण और इसके स्रोत का पता लगाया जा सकता है।
न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी ने ‘एक्स’ पर नदी के किनारे मृत पड़ी मछलियों की तस्वीरें और वीडियो साझा किये। सोसाइटी ने अपने ‘एक्स’ प्रोफाइल में खुद को ‘‘जागरूकता फैलाने वाले व्यक्तियों का एक समूह’’ बताया है।
इसने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मछलियों की मौत का सटीक कारण अभी पता नहीं चला है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हरियाणा से नहरों के जरिये रासायनिक कचरा यमुना में छोड़ा जा रहा है। क्या इसका संबंध 12 अक्टूबर को हुई अम्लीय वर्षा से हो सकता है?’’
सोसाइटी ने कहा कि मछलियों की मौत जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहे दबाव का संकेत हो सकती है और इसके संभावित कारणों में पानी की गुणवत्ता में गिरावट, पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर कम होना और जहरीले पदार्थों की मौजूदगी शामिल हैं।
ये तस्वीरें यमुना में प्रदूषण को लेकर लगातार बनी चिंताओं के बीच सामने आई हैं। नदी को साफ करने के बार-बार किये गये प्रयासों के बावजूद प्रदूषण से जुड़ी चुनौतियां बरकरार हैं।
पिछले साल मई में भी बुराड़ी में बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत होने की खबरें आई थीं।
उस समय सामने आये दृश्यों में नदी में हजारों मृत मछलियां दिखाई दी थीं। स्थानीय लोगों ने इन मौतों के लिए हरियाणा से कथित तौर पर छोड़े गए रासायनिक कचरे को जिम्मेदार ठहराया था। उस समय आई खबरों में प्रदूषण का स्तर अधिक होने की बात भी कही गई थी।
इस साल मई में भीषण गर्मी और जलस्तर घटने के बीच पूर्वी दिल्ली की संजय झील में सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई थी। विशेषज्ञों ने इसके संभावित कारणों में उच्च तापमान, प्रदूषकों की बढ़ती सांद्रता और पानी में घुलित ऑक्सीजन के घटते स्तर को जिम्मेदार ठहराया था।
भाषा
देवेंद्र सुरेश
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