Breaking News

पंजाब में आज से 3 लाख सरकारी कर्मचारी 'हड़ताल' पर, दफ्तरों से बस सेवाओं तक पड़ेगा असर     |   एशियाई पैरा खेलों में प्रवीण कुमार ने जीता गोल्ड, बंटी ने जीता सिल्वर     |   ओम प्रकाश राजभर ने 29 नवंबर को आजमगढ़ में विशाल रैली का किया ऐलान     |   एशियाई पैरा खेलों में आयुष वर्मा ने शॉट पुट F53 इवेंट में जीता गोल्ड     |   सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ीं, दूसरा केस भी क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर     |  

रेहड़ी-पटरी वालों को भी कर्ज दिलाने के लिए खाता एग्रीगेटर व्यवस्था का दायरा बढ़े: नीलेकणि

नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने बृहस्पतिवार को ‘अकाउंट एग्रीगेटर’ व्यवस्था के व्यापक उपयोग की वकालत की। उन्होंने कहा कि इससे स्वरोजगार करने वाले लोगों और अस्थायी काम करने वाले श्रमिकों को कर्ज हासिल करने में मदद मिल सकती है।

‘अकाउंट एग्रीगेटर’ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) हैं, जो ग्राहकों से जुड़ी वित्तीय जानकारी प्राप्त करने या एकत्र करने की सेवा देती हैं। ग्राहक की सहमति के बिना इस व्यवस्था के तहत कोई वित्तीय जानकारी प्राप्त, साझा या हस्तांतरित नहीं की जाती है।

नीलेकणि ने कहा, ‘‘हमें वेतनभोगी लोगों से आगे बढ़ना होगा, क्योंकि वे हमारे पूरे परिवेश का सिर्फ एक हिस्सा हैं। हमारा सपना है कि सब्जी बेचने वाली महिला को भी रोजाना सामान खरीदने के लिए कर्ज मिल सके। ‘अकाउंट एग्रीगेटर’ व्यवस्था से हम यही हासिल करना चाहते हैं।’’

उन्होंने कहा कि मंच पर वित्तीय जानकारी के अधिक स्रोतों को जोड़कर इस व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाया जा सकता है। इससे कर्ज देने वाली संस्थाओं को ऐसे लोगों की ऋण चुकाने की क्षमता का आकलन करने में मदद मिलेगी, जिनके पास अधिक संपत्ति नहीं है।

नीलेकणि ने कहा, ‘‘भारत में परंपरागत रूप से कर्ज संपत्ति के आधार पर दिया जाता रहा है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति के पास कोई संपत्ति नहीं है, तो उसे कर्ज कैसे मिलेगा? उसे आंकड़ों का उपयोग कर कर्ज मिल सकता है और हम यहां यही कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़ी जानकारी, आयकर रिटर्न और बैंक खाते के आंकड़ों को एक साथ जोड़कर छोटे कारोबारियों और स्वरोजगार करने वालों को नकदी प्रवाह के आधार पर कर्ज दिया जा सकता है।

नीलेकणि ने कहा, ‘‘अगर आपके पास जीएसटी के आंकड़े, आयकर रिटर्न और चालू खाते की जानकारी है, तो ये छोटे कारोबारियों और स्वरोजगार करने वालों को नकदी प्रवाह के आधार पर कर्ज देने का आधार बन सकते हैं।’’

उन्होंने अकाउंट एग्रीगेटर व्यवस्था के जरिये उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों का दायरा बढ़ाने की भी वकालत की। उन्होंने आयकर रिटर्न, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के रिकॉर्ड, छोटी बचत योजनाओं, फास्टैग के आंकड़ों और जन केंद्रित सेवाओं के बिलों के भुगतान को संभावित स्रोत बताया।

नीलेकणि इस व्यवस्था के लिए टिकाऊ कारोबारी मॉडल की जरूरत पर भी जोर दिया। खाता एग्रीगेटर कंपनियों के लिए राजस्व अर्जित करने की व्यवस्था होनी चाहिए और वित्तीय जानकारी उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं को भी इसके लिए भुगतान करने की जरूरत पड़ सकती है।

भाषा रमण अजय

अजय