प्रयागराज, 15 अक्टूबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी की अपील खारिज करने वाले अपीलीय अधिकारी के आदेश को रद्द कर दिया है। अंसारी ने अपने तीन शस्त्र लाइसेंस रद्द किए जाने के खिलाफ यह अपील की थी।
अफजाल अंसारी, वर्तमान में गाजीपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं।
न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने अफजाल अंसारी द्वारा दायर तीन रिट याचिकाएं निस्तारित करते हुए 28 मार्च, 2026 के अपीलीय अधिकारी के आदेश को रद्द कर दिया और इस मामले को पुनर्विचार के लिए अपीलीय अधिकारी- वाराणसी के मंडलायुक्त के पास वापस भेज दिया।
हालांकि, अदालत ने निर्देश दिया कि अपीलीय अधिकारी इस मामले पर भी विचार कर सकते हैं कि क्या याचिकाकर्ता के खिलाफ अन्य आपराधिक मामले लंबित हैं और उनके निष्कर्ष क्या हैं।
अफजाल अंसारी के पास तीन शस्त्र लाइसेंस थे जिन्हें गाजीपुर के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अलग अलग आदेशों के जरिए इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि अंसारी आपराधिक मामलों में संलिप्त थे, इसलिए लोक शांति की सुरक्षा और लोक व्यवस्था के लिए इन शस्त्रों के लाइसेंस निरस्त करना आवश्यक है। इसके बाद अलग अलग आदेशों से इन आपीलों को भी खारिज कर दिया गया।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोधी) कानून, 1986 के तहत एक मामले में इस अदालत द्वारा 29 जुलाई, 2024 को दोषसिद्धि का आदेश रद्द कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि शस्त्र लाइसेंसों को रद्द करने का यह एकमात्र आधार था और मंडलायुक्त के समक्ष (अदालत का) आदेश प्रस्तुत किए जाने के बावजूद, इसे नजरअंदाज करते हुए सभी तीनों अपीलें खारिज कर दी गईं।
वहीं दूसरी ओर, अपर महाधिवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ अन्य आपराधिक मामले अब भी लंबित हैं और याचिकाकर्ता अच्छे आचरण का व्यक्ति नहीं है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने मंगलवार को दिए अपने निर्णय में कहा, ‘‘इस बात में कोई विवाद नहीं है कि याचिकाकर्ता को गैंगस्टर मामले में बरी कर दिया गया था। एक अन्य मामले में बरी करने के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने अपील की है जो अभी लंबित है, जबकि दूसरा मामला आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ा है।’’
अदालत ने कहा कि शस्त्र नियम, 2016 के मुताबिक, एक व्यक्ति केवल दो शस्त्र लाइसेंस रख सकता है।
भाषा सं राजेंद्र सुरभि
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