नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित समिति ने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में 20 जुलाई को विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है।
समिति ने पोर्टल के माध्यम से प्रभावित लोगों और गवाहों से शिकायतें, बयान और साक्ष्य मांगे हैं और संवेदनशील गवाहों की पहचान गोपनीय रखने का आश्वासन दिया है।
उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति (एचपीईसी) ने प्रभावित लोगों, गवाहों और अन्य संबंधित पक्षों से पोर्टल पर उपयुक्त प्रारूप चुनकर अपनी शिकायतें, अभ्यावेदन, बयान, दस्तावेज और अन्य प्रासंगिक साक्ष्य जमा करने को कहा है।
समिति की एक अधिसूचना के अनुसार, जानकारी और सामग्री जमा करने के लिए निर्धारित प्रारूप भी जारी किए गए हैं।
अधिसूचना में कहा गया है कि लोग राउज एवेन्यू इंस्टीट्यूशनल एरिया में स्थित शिक्षा सदन, 17 में स्थित एचपीईसी के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से अपने अभ्यावेदन जमा कर सकते हैं।
उच्चतम न्यायालय ने जुलाई 2026 के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर और राष्ट्रीय राजधानी के बाहर विभिन्न स्थानों पर हुई हिंसा की घटनाओं के सभी पहलुओं की जांच के लिए पांच-सदस्यीय एचपीईसी गठित की थी। इसमें इन घटनाओं से जुड़े व्यापक मुद्दे भी शामिल हैं।
न्यायमूर्ति रेड्डी के अलावा, समिति में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक एल. आर. बिश्नोई शामिल हैं।
दिल्ली में 20 जुलाई को कॉजपा के नेतृत्व में संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुईं। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने संसद की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठी और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया।
यह आंदोलन 20 जून को जंतर-मंतर पर शुरू हुआ और 25 जुलाई को तब खत्म किया गया, जब शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया और सरकार ने कॉजपा की अन्य मांगें भी मान लीं।
भाषा संतोष सुरेश
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