(सज्जाद हुसैन और एम. जुलकरनैन)
इस्लामाबाद/लाहौर, 15 अक्टूबर (भाषा) पाकिस्तान की संसद ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और राज्यपाल शासन लागू करने के संघीय सरकार के फैसले को बृहस्पतिवार को मंजूरी दे दी। इससे पहले इस प्रांत में जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का शासन था।
राष्ट्रीय असेंबली और सीनेट की संयुक्त बैठक के दौरान विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने ‘‘इमरजेंसी नामंजूर’’ जैसे नारे लिखी तख्तियां ले रखी थीं।
शहबाज शरीफ सरकार ने बढ़ती हिंसा के बीच आंदोलन-रोधी प्रयासों से प्रांतीय सरकार के कथित तौर पर पीछे हटने का हवाला देते हुए 11 अक्टूबर को यहां आपातकाल और राज्यपाल शासन लागू कर दिया था।
यह कदम केंद्र सरकार और पीटीआई के बीच कई हफ्तों से जारी तनाव के बाद उठाया गया। पीटीआई ने जेल में बंद अपने संस्थापक इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर इस्लामाबाद तक लंबा मार्च निकालने का ऐलान किया था। पार्टी ने खान से जेल में मुलाकात की अनुमति देने और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की भी मांग की थी, ताकि उनके निजी चिकित्सक उनकी जांच कर सकें।
इस संघीय हस्तक्षेप से पीटीआई के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार प्रभावी रूप से सत्ता से बाहर हो गई।
बृहस्पतिवार को संसद के संयुक्त सत्र के दौरान संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने संसद (संयुक्त सत्र) नियमावली, 1973 के नियम 232 के तहत एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें कुछ उपनियमों को निलंबित करने की मांग की गई।
उन्होंने इसके बाद दो प्रस्ताव पेश किए, जिनमें से एक संविधान के अनुच्छेद 232 के तहत आपातकाल की घोषणा से संबंधित था और दूसरा अनुच्छेद 234 के तहत राज्यपाल शासन से जुड़ा था।
नेशनल असेंबली के एक बयान के अनुसार, सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी बहस के बाद दोनों प्रस्ताव पारित कर दिए गए।
भाषा
प्रचेता सुरेश
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