नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की परियोजनाओं में बनने वाले बड़े पुलों और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं के डिजाइन की अब स्वतंत्र जांच होगी। इसका उद्देश्य निर्माण से पहले डिजाइन की संभावित खामियों का पता लगाना और पुलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
एनएचएआई ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस व्यवस्था के तहत प्रमुख पुलों और अन्य चिह्नित संरचनाओं के डिजाइन एवं ड्राइंग की जांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी), प्रतिष्ठित सरकारी तकनीकी संस्थानों और संबंधित क्षेत्र की अनुभवी तकनीकी कंपनियों से कराई जाएगी।
यह व्यवस्था एक दिसंबर, 2026 से लागू होगी। इसके तहत 3,000 घन मीटर प्रति सेकंड या इससे अधिक जल प्रवाह क्षमता वाले प्रमुख नदी पुलों और 40 मीटर या इससे अधिक लंबे पुलों एवं अन्य संरचनाओं की स्वतंत्र जांच की जाएगी।
प्राधिकरण के मुताबिक, स्वतंत्र जांच से डिजाइन संबंधी खामियों का शुरुआती चरण में पता लगाने और भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) के मानकों, तकनीकी विनिर्देशों तथा अनुबंध की शर्तों का पालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
यह नीति सभी नई इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण (ईपीसी), हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (एचएएम) और निर्माण-संचालन-हस्तांतरण (बीओटी) आधारित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर लागू होगी। उन परियोजनाओं को भी इसके दायरे में रखा जाएगा, जिनमें डिजाइन सत्यापन या स्वतंत्र जांच की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है।
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