नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक पैनल ने बृहस्पतिवार को उन लोगों की बात सुनी, जिनके नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कवायद के बाद मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
इस पैनल में उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश ए. के. पटनायक, दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रेखा शर्मा और पटना उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश अंजना प्रकाश शामिल थीं।
पैनल ने ‘लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन’ (एलएएफसी) द्वारा एसआईआर पर गठित स्वतंत्र आयोग की एक सार्वजनिक सुनवाई में हिस्सा लिया।
आयोग के प्रमुख और उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर पैनल की पहली सार्वजनिक सुनवाई में शामिल नहीं हो सके।
एलएएफसी ने इससे पहले न्यायमूर्ति लोकुर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय आयोग का गठन किया था, जिसका काम निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की संवैधानिक और कानूनी वैधता, कार्यप्रणाली और समग्र प्रभाव की जांच पड़ताल करना था।
राष्ट्रीय राजधानी के जवाहर भवन में आयोजित सुनवाई में, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, तेलंगाना, बिहार और राजस्थान में इस प्रक्रिया से प्रभावित लोगों के बयान सुने गए।
आयोग के सामने गवाही देने वालों में पश्चिम बंगाल के पूर्व सांसद तरुण मंडल भी शामिल थे, जिनका नाम एसआईआर के बाद मतदाता सूची से हटा दिया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘इस एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से मेरा नाम हटा दिया गया। मैंने आवेदन किया था और मैंने तथा मेरे पूरे परिवार-मेरी पत्नी सहित-ने फॉर्म भरे थे, लेकिन ईएलओ आदि द्वारा जांच के बाद उन्होंने मुझे अयोग्य घोषित कर दिया।’’
दक्षिण हावड़ा विधानसभा क्षेत्र के निवासी और पेशे से डॉक्टर मंडल ने बताया कि उनका नाम पहले बूथ नंबर 279 के तहत दर्ज था, लेकिन हाल ही में हुए पुनरीक्षण के दौरान इसे हटा दिया गया।
दिल्ली के मंगोलपुरी निवासी कांता प्रसाद ने पैनल को बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा उन्हें मृत घोषित किए जाने के बाद उनका नाम हटा दिया गया।
आयोग को उसके समन्वयकों द्वारा प्रस्तुतियों के माध्यम से, विभिन्न राज्यों में मतदाताओं के नाम हटाए जाने और इससे प्रभावित लोगों को पेश आ रही कठिनाइयों के बारे में भी जानकारी दी गई।
भाषा नेत्रपाल पवनेश
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