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भोपाल, 15 अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर उनकी याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए हैं।
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने यहां प्रेसवार्ता में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एसआईआर प्रक्रिया का दुरुपयोग कर देश के मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
विपक्ष फिलहाल कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को वापस लेने की मांग कर रहा है।
सिंह ने कहा कि कानून के मुताबिक तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग में बहुमत से लिया गया निर्णय ही मान्य होता है।
उन्होंने आरोप लगाया, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ज्ञानेश कुमार ने शेष दो निर्वाचन आयुक्तों से परामर्श किए या उन्हें सूचित किए बिना कई मनमाने फैसले किये। उन्होंने उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया और भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए 13 करोड़ से अधिक पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए। यह पूरी तरह असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक कृत्य है।”
सिंह ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत 12 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय ने बृहस्पतिवार को स्वीकार कर लिया।
उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 326 सभी पात्र नागरिकों को मतदाता के रूप में पंजीकरण का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने का निर्णय लेने का अधिकार स्थानीय स्तर के निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) के पास है और इस वैधानिक प्रक्रिया को किसी इलेक्ट्रॉनिक सॉफ्टवेयर के जरिये बदला नहीं जा सकता।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने दोनों निर्वाचन आयुक्तों की अनदेखी करते हुए ईआरओ को ईसीआईनेट के माध्यम से आंकड़ों को अद्यतन करने से रोक दिया और उनके अधिकारों का अतिक्रमण किया।
सिंह ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 के खंड ‘जे’ और ‘के’ के बीच एक घोषणा जोड़ी थी, जिसमें आवेदक से पूछा गया था कि क्या उसका या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछले एसआईआर की मतदाता सूची में दर्ज था।
उन्होंने आरोप लगाया कि गलत जानकारी देने पर दंड की चेतावनी भी दी गई थी और यह जानकारी दिए बिना ऑनलाइन आवेदन जमा नहीं किया जा सकता था।
सिंह ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत तैयार किए गए इस फॉर्म के कारण करोड़ों मतदाताओं के नाम सूचियों से हट गए। उन्होंने सवाल किया कि निर्वाचन आयोग ने फॉर्म-6 में यह नया घोषणा-पत्र किस अधिकार से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 के माध्यम से किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है, लेकिन सत्यापन के बिना नाम नहीं हटाया जा सकता।
सिंह ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने अज्ञात व्यक्तियों द्वारा सामूहिक रूप से दाखिल किए गए फॉर्म-7 के आधार पर उचित सत्यापन किए बिना करोड़ों मतदाताओं के नाम हटा दिए।
भाषा दिमो
राजकुमार
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