नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष के. सी. वेणुगोपाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि अनुसूचित जाति (एससी) के विद्यार्थियों के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां सामने आई हैं तथा कुछ विद्यार्थियों को अपनी बकाया छात्रवृत्ति के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ा।
वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि पीएसी ने बृहस्पतिवार को एससी विद्यार्थियों के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं की समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि लेखा परीक्षा में सामने आया कि प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की बकाया राशि के लिए विद्यार्थियों को 48 महीने तक, जबकि पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 89 महीने तक इंतजार करना पड़ा। कुछ विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति की राशि मिली ही नहीं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि विद्यार्थियों की आय और जाति संबंधी पात्रता का सत्यापन नहीं किया गया तथा कुछ मामलों में गैर-अनुसूचित जाति लाभार्थियों को भी भुगतान किया गया, जबकि पात्र विद्यार्थी अपनी छात्रवृत्ति का इंतजार करते रहे।
वेणुगोपाल के मुताबिक, खराब प्रदर्शन करने वाले छह राज्यों के मुख्य सचिवों को समिति के समक्ष मौखिक साक्ष्य देने के लिए तलब किया गया था, लेकिन उनमें से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि समिति ने मुख्य सचिवों की अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया है और इसे ‘‘अवमानना’’ मानते हुए विशेषाधिकार नियमों के तहत कार्रवाई के लिए लोकसभा अध्यक्ष के संज्ञान में लाने का फैसला किया है।
वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘एक दलित बच्चे के लिए छात्रवृत्ति यह तय करती है कि उसकी पहुंच कक्षा तक बनी रहेगी या नहीं।’’
उन्होंने कहा कि पीएसी सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने को संवैधानिक दायित्व मानती है और प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को उसका हक मिलने तक संबंधित राज्यों तथा मंत्रालयों की जवाबदेही तय करती रहेगी।
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