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2020 दिल्ली दंगे: अदालत ने पांच आरोपियों को बरी किया

नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान दंगे और एक व्यक्ति की हत्या का प्रयास करने के आरोपी पांच लोगों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जांच एजेंसी ने मामले में कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की लेकिन यह साबित करने में विफल रही कि पीड़ित के घायल होने के समय वे घटनास्थल पर मौजूद थे।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी पांच लोगों - राज कुमार, दीपक तोमर, गुरमीत सिंह, गौरव और विक्रम - के खिलाफ एक मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिन पर भारतीय दंड संहिता के तहत दंगा करने, घातक हथियारों के साथ दंगा करने, गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने, हत्या की कोशिश करने और समान इरादे से अपराध करने का आरोप है। विक्रम की मौत के बाद, 15 जुलाई को अदालत ने उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही को समाप्त कर दिया था।

अदालत ने 14 अक्टूबर के एक आदेश में कहा, “अदालत को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि इस मामले में प्राथमिकी घटना के तीन दिन बाद दर्ज की गई थी... हैरानी की बात यह है कि हेड कांस्टेबल सोनू और रफीक के बयान काफी देर से दर्ज किए गए, जिससे पता चलता है कि जांच एजेंसी ने मामला बनाने और उसे सुलझाने के लिए अपनी जांच में रह गई कमियों को दूर करने की कोशिश की।”

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से सीसीटीवी फुटेज और तस्वीरों के जरिए आरोपियों की पहचान पर टिका था, जो कि एक कमजोर सबूत है, खासकर इसलिए क्योंकि पुलिस गवाह पहले से उन्हें नहीं जानता था।

यह मामला 25 फरवरी 2020 को कर्दमपुरी पुलिया के पास हुई एक घटना से जुड़ा है, जहां हिंसा के दौरान रिजवान नाम के एक व्यक्ति के सिर में गोली लग गई थी।

आरोपी गौरव और गुरमीत सिंह की ओर से पेश वकील शकील अहमद और जावेद जमील ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष का मामला झूठा है और घटना के समय आरोपी मौके पर मौजूद नहीं थे।

उन्होंने तर्क दिया कि घायल व्यक्ति, रिजवान और अन्य गवाहों ने अपने बयानों या अदालत में दी गई गवाही में न तो आरोपियों का नाम लिया और न ही उनकी पहचान की।

अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी घटना स्थल पर मौजूद थे, किसी गैर-कानूनी समूह का हिस्सा थे, या उन पर लगाए जा रहे अपराधों के आरोपों में शामिल थे।

भाषा प्रशांत संतोष

संतोष