कुआलालंपुर, 15 अक्टूबर (भाषा) मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित 'ग्लोबल टिपिंग पॉइंट्स कॉन्फ्रेंस 2026' में 37 देशों के 500 से अधिक प्रतिभागियों ने बृहस्पतिवार को एक घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसमें जीवाश्म ईंधन पर दी जाने वाली सब्सिडी हटाने, कार्बन उत्सर्जन के लिए कीमत तय करने, संकट से निपटने के लिए पहले से वित्तीय गुंजाइश की व्यवस्था और जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का आह्वान किया गया।
‘कुआलालंपुर टिपिंग पॉइंट्स डिक्लेरेशन’ नामक इस घोषणा-पत्र में यह भी कहा गया कि भौतिक, सामाजिक, आर्थिक और सरकार की वित्तीय स्थिति से जुड़े निर्णायक बिंदु आपस में जुड़े हुए हैं तथा एशिया इन बदलावों के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील होने के साथ-साथ इनके समाधान में भी केंद्रीय भूमिका रखता है।
यह सम्मेलन 12 से 15 अक्टूबर तक आयोजित किया गया। इसमें पृथ्वी के पर्यावरणीय तंत्र में आने वाले निर्णायक बदलावों को समझने के लिए शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
‘टिपिंग पॉइंट्स’ मूल रूप से ऐसे महत्वपूर्ण बिंदु हैं, जिन्हें पार करने के बाद कोई प्राकृतिक प्रणाली पूरी तरह अलग स्थिति में पहुंच सकती है जिसके पृथ्वी के लिए अपरिवर्तनीय और विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं, जिनमें तापमान में और वृद्धि भी शामिल है।
'ग्लोबल वार्मिंग' के वर्तमान स्तर पर भी पर्यावरण के संतुलन को बिगाड़ने वाली बेहद गंभीर प्रक्रियाओं के सक्रिय होने का जोखिम बना हुआ है।
स्थिति से निपटने के लिए घोषणा-पत्र में कहा गया कि दुनिया भर की सरकारों को इन जोखिमों पर चर्चा करने और स्वच्छ एवं सुरक्षित ऊर्जा की ओर बदलाव में तेजी लाने की जरूरत है। साथ ही, जीवाश्म ईंधन को तेजी से, न्यायसंगत और व्यवस्थित तरीके से चरणबद्ध रूप से समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
भाषा
प्रचेता संतोष
संतोष