लखनऊ, 15 अक्टूबर (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं निर्वाचन आयोग पर मतदाता सूची में कथित हेरफेर के लिए मिलीभगत करने का आरोप लगाया।
यादव ने कहा कि दोनों मिलकर ‘‘भारत के लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों को धोखा दे रहे हैं।’’
उन्होंने यहां सपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि जब भाजपा का जनसमर्थन घटता है और उसकी हार की आशंका बढ़ती है, तो वह निर्वाचन आयोग की आड़ लेती है।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा चुनावों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की तैयारी कर रही है ।
यादव ने भाजपा की कथित ‘10 चुनावी चालों’ का जिक्र करते हुए फर्जी मतदाता जोड़ने, विरोधियों के वास्तविक वोट कटवाने, मतदान से पहले पैसे और भोजन बांटने, मतदाताओं को डराने, ईवीएम में हेरफेर और मतगणना में धांधली के आरोप लगाए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हारने वाले उम्मीदवारों को विजेता घोषित कर प्रमाणपत्र दिए जाते हैं तथा चुनाव के बाद विपक्षी दलों में फूट डालकर उनके विधायकों को तोड़ा जाता है।
सपा प्रमुख ने बताया कि पार्टी के ‘पीडीए प्रहरी’ सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूचियों की जांच कर रहे हैं।
यादव के मुताबिक, इस दौरान 19.2 लाख संदिग्ध फर्जी मतदाता प्रविष्टियों की पहचान की गई है।
सपा प्रमुख ने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए कुल 87.66 लाख फॉर्म-6 आवेदन मिले थे, जिनमें से 84.30 लाख नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि लेकिन निर्वाचन आयोग ने केवल 71.38 लाख आवेदनों का विवरण सार्वजनिक किया और 16.18 लाख आवेदनों की जानकारी सामने नहीं रखी।
उन्होंने दावा किया कि इन मामलों के अतिरिक्त पार्टी कार्यकर्ताओं ने तीन लाख और संदिग्ध प्रविष्टियां चिह्नित की हैं।
यादव ने कहा कि कुछ रिकॉर्ड में मतदाताओं और उनके माता-पिता के नाम समान हैं। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में 10,000 से 15,000 तक संदिग्ध प्रविष्टियां मिली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को जिन निर्वाचन क्षेत्रों में हार का डर है, वहां ऐसी गड़बड़ियां अधिक हैं।
मुरादाबाद नगर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा 782 वोटों से हारी थी। उनके दावे के मुताबिक, इसके बाद वहां करीब 8,000 से 10,000 संदिग्ध फर्जी प्रविष्टियां जोड़ी गईं।
उन्होंने कुछ रिकॉर्ड दिखाते हुए दावा किया कि एक व्यक्ति के नाम पर 10 और शंभू शंकर शर्मा के नाम पर चार प्रविष्टियां थीं।
उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी प्रविष्टियों का इस्तेमाल चुनाव परिणाम प्रभावित करने के लिए हो सकता है।
यादव ने बताया कि पार्टी ने फर्जी और दोहरी प्रविष्टियों को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं। उन्होंने मतदाताओं से अपने पहचान पत्र नंबर के जरिए रिकॉर्ड जांचने की अपील की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) के पदों पर पीडीए समुदायों के किसी सदस्य को नियुक्त नहीं किया गया । उन्होंने निर्वाचन आयोग को इस दावे को गलत साबित करने की चुनौती दी।
मतदाता सूची से आधार विवरण को बाहर रखे जाने पर सवाल उठाते हुए, यादव ने कहा कि सरकार के पास आधार के जरिए नागरिकों की व्यापक जानकारी उपलब्ध है, ऐसे में इसे मतदाता सूची से क्यों नहीं जोड़ा जाता।
उन्होंने कहा, ''जब आपके पास आधार के जरिए इतनी व्यापक जानकारी है, तो इसे मतदाता सूची से क्यों नहीं जोड़ते? इससे कई समस्याएं दूर हो सकती हैं।''
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा मतदाता सूचियों में गड़बड़ी कर सकती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी व्यक्ति का नाम गांव और शहर, दोनों जगहों की मतदाता सूचियों में दर्ज न हो।
यादव ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी सभी 80 लोकसभा सीट जीत भी जाए तो भी वह इन पर भरोसा नहीं करेगी।
उन्होंने जर्मनी का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां की अदालतों ने ईवीएम से चुनाव कराने को असंवैधानिक माना ।
यादव ने कहा कि तकनीक और अर्थव्यवस्था के लिहाज से विकसित जर्मनी भी अपने नागरिकों के लिए ईवीएम से मतदान नहीं चाहता।
उन्होंने सवाल किया कि जब जर्मनी जैसा विकसित देश ईवीएम के इस्तेमाल से बचता है, तो भारत में इनके जरिए चुनाव क्यों कराए जा रहे हैं।
सपा प्रमुख ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाता सूचियों को त्रुटिरहित बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
भाषा चंदन जफर सलीम राजकुमार
राजकुमार