नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छात्रों से फीस के रूप में ली गई 85 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के कथित गबन से जुड़े धन शोधन के मामले में बृहस्पतिवार को फिटजी और इसके निदेशक दंपति दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। यह मामला छात्रों से वसूले गए 85 करोड़ रुपये से अधिक की कथित हेराफेरी से जुड़ा है।
केंद्रीय एजेंसी के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (आरोपपत्र) दाखिल की।
ईडी ने एक बयान में कहा कि आरोपपत्र में कोचिंग संस्थान फिटजी लिमिटेड और गोयल दंपति को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी ने पीएमएलए के तहत उन्हें दोषी ठहराने के साथ-साथ जांच के दौरान जब्त और अस्थायी रूप से कुर्क की गई 71.88 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त करने का अनुरोध किया है।
‘पीटीआई-भाषा’ ने फिटजी लिमिटेड से इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी है।
एजेंसी ने इस मामले में नौ अक्टूबर को 66.92 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। वहीं, अप्रैल 2025 में की गई तलाशी के दौरान 10 लाख रुपये नकद और 4.86 करोड़ रुपये के आभूषण जब्त किए थे।
ईडी के अनुसार, अपने पास रखी गई और गबन की गई फीस की कुल राशि 85.79 करोड़ रुपये थी जिसे इस मामले में अपराध से अर्जित आय के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
ईडी का धनशोधन मामला पुलिस की चार प्राथमिकी से जुड़ा है। इनमें से दो उत्तर प्रदेश पुलिस ने नोएडा में और दो मध्य प्रदेश पुलिस ने भोपाल में दर्ज की थीं। इन प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि कोचिंग संस्थान ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में प्रवेश के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की दो से चार साल की कोचिंग देने के लिए प्रति छात्र अग्रिम रूप से 2.8 लाख रुपये से 3.5 लाख रुपये तक की फीस वसूली थी। संस्थान ने इसके लिए पूरा पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था।
हालांकि, ईडी के अनुसार वेतन नहीं मिलने के कारण शिक्षक संस्थान छोड़कर चले गए और बिना किसी पूर्व सूचना के कोचिंग संस्थान को अचानक बंद कर दिया गया।
ईडी ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने फीस की राशि का ‘‘दूसरी जगह इस्तेमाल किया’’ और शिक्षकों के संस्थान छोड़ने के बाद भी नए छात्रों से ‘‘झूठे’’ आश्वासन देकर फीस वसूलना जारी रखा।
एजेंसी के अनुसार जांच में पता चला कि फिटजी ने मई 2024 से फरवरी 2025 के बीच अचानक 32 कोचिंग सेंटर बंद कर दिए जिससे नामांकित 14,411 छात्र उस कोचिंग सुविधा से वंचित रह गए जिसके लिए उन्होंने फीस चुकाई थी।
ईडी ने कहा कि कंपनी ने मार्च 2029 तक चलने वाले पाठ्यक्रमों के लिए भी छात्रों को प्रवेश देना जारी रखा जबकि उसे पता था कि वह इन पाठ्यक्रमों को पूरा नहीं करा सकती।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि कंपनी लगातार घाटे में काम कर रही थी फिर भी वसूली गई फीस खर्च की जाती रही।
ईडी ने यह भी दावा किया कि गोयल दंपति ने वित्त वर्ष 2022-23 से वेतन के रूप में 24.92 करोड़ रुपये निकाले।
ईडी ने कहा, ‘‘गोयल परिवार के पास 86.31 प्रतिशत शेयर था। निदेशकों ने बिना किसी स्वतंत्र जांच के अपने वेतन को मंजूरी दी। उन्होंने अन्य कर्मचारियों के वेतन में देरी या भुगतान नहीं होने के बावजूद सबसे पहले खुद को वेतन दिया।।’’
एजेंसी ने कहा कि दिनेश कुमार को प्रति माह लगभग 56 लाख रुपये वेतन मिलता था, जबकि मोनिला को प्रति माह 25 लाख रुपये से अधिक दिए जाते थे। हालांकि, मोनिला ने स्वीकार किया था कि वह नियमित रूप से कार्यालय नहीं जाती थीं और घर से ही चेक पर हस्ताक्षर करती थीं।
ईडी ने आरोप लगाया कि कोचिंग सेंटर बंद होने के दौरान भी मोनिला को भुगतान जारी रहा।
एजेंसी के अनुसार, नोएडा पुलिस ने इससे पहले 300 पीड़ितों, कोचिंग सेंटर के संचालकों और अन्य गवाहों के बयानों के साथ-साथ फीस की रसीदों के आधार पर गोयल दंपति के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
फिटजी की स्थापना 1992 में हुई थी और इसका मुख्यालय दिल्ली में है।
भाषा सुरभि अविनाश
अविनाश