(फाइल फोटो के साथ)
लखनऊ, 15 अक्टूबर (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर बैंकिंग व्यवस्था को सूदखोरी से भी बदतर बना देने का आरोप लगाते हुए बैंकिंग से जुड़ी समस्याओं पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा।
यादव ने ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट में बैंकिंग व्यवस्था को लेकर 12 सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 से बैंकिंग सुधारों की बात करने वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में आम लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सपा प्रमुख ने कहा, ‘‘जो भाजपा सरकार 2014 से बैंकिंग सुधार की बात कर रही है, वह पिछले 12 सालों में बदहाल बैंकिंग से जुड़े अनगिनत सवालों में से केवल 12 बिंदुओं पर ही अपनी सफाई दे दे तो बैंकिंग की समस्याओं से जूझ रही आम जनता को कुछ तो तसल्ली होगी।’’
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश ने बैंक खातों में न्यूनतम राशि नहीं रखने पर लगने वाले जुर्माने और एसएमएस, एटीएम तथा खाता रखरखाव जैसी सेवाओं के लिए शुल्क वूसले जाने पर सवाल उठाए।
उन्होंने छोटे कर्जदारों से वसूली के लिए एजेंट भेजने और दूसरी ओर बड़े कर्जदारों के हजारों करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए जाने को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।
यादव ने बुजुर्गों और पेंशन पर निर्भर लोगों की जमा राशि पर ब्याज दरें घटाए जाने तथा नोटबंदी के दौरान आम लोगों को अपने पैसे बदलने के लिए कतारों में खड़े होने की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी के दौरान काले धन को सफेद करने के लिए कथित तौर पर पिछले दरवाजे से रास्ते निकाले गए।
सपा प्रमुख ने बैंक लॉकरों में रखे कीमती सामान और दस्तावेजों की सुरक्षा, लॉकर के बढ़ते किराये तथा चोरी होने की स्थिति में मुआवजे की सीमा मात्र पांच लाख रुपये ही रखे जाने को लेकर भी सवाल किए।
यादव ने साथ ही, बार-बार केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) प्रक्रिया अपनाने, ऑनलाइन केवाईसी में आने वाली दिक्कतों और इसके कारण बुजुर्गों की पेंशन तथा जमा राशि अटकने का मुद्दा भी उठाया।
सपा अध्यक्ष ने डिजिटल बैंकिंग में धोखाधड़ी, खातों से पैसे कटने के बाद शिकायतों के निस्तारण और ग्राहक सेवा केंद्रों की उपलब्धता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छोटे कर्ज के लिए आम लोगों को कई दस्तावेजों और प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जबकि कुछ बड़े कर्जदार कथित मिलीभगत से भारी रकम लेकर फरार हो जाते हैं।
यादव ने खाता खोलने के दौरान बीमा, क्रेडिट कार्ड और सावधि जमा (एफडी) लेने के लिए दबाव बनाए जाने तथा बैंक कर्मचारियों की कार्यस्थितियों और सेवा संबंधी मांगों की अनदेखी का आरोप भी लगाया।
उन्होंने कहा कि बैंक कर्मचारियों को ग्राहकों की नाराजगी का सामना करना पड़ता है, जबकि सरकार उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं देती।
भाषा सलीम
राजकुमार
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