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किसानों के विरोध-प्रदर्शन के बीच महाराष्ट्र में 55 में से सिर्फ 19 चीनी मिलों में ही गन्ने की पेराई

नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) गन्ना किसानों के जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच महाराष्ट्र की 55 चीनी मिलों में से केवल 19 में ही 2026-27 के पेराई सत्र में काम शुरू हुआ है, जबकि कर्नाटक में अबतक पेराई शुरू नहीं हुई है। किसानों की शिकायतों पर गौर करने के लिए सरकार ने एक समिति गठित की है। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों के मुताबिक, बृहस्पतिवार को चार चीनी मिलों ने पेराई शुरू की, जबकि देश में चीनी की ऊंची कीमतों के बीच 15 मिलों ने आठ अक्टूबर से काम शुरू कर दिया था। महाराष्ट्र की अन्य चीनी मिलों ने अक्टूबर में शुरू होने वाले पेराई सत्र से पहले की परंपरागत पूजा कर ली है।

सूत्रों ने बताया कि अगले दो-तीन दिन में 30 और मिलों में काम शुरू होने की उम्मीद है।

गन्ना किसानों के विरोध-प्रदर्शन से नए पेराई सत्र का कामकाज प्रभावित हुआ है। किसान गन्ने के लिए अधिक समर्थन मूल्य और चीनी तथा एथनॉल के न्यूनतम बिक्री मूल्य में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।

नया पेराई सत्र एक अक्टूबर से शुरू हो चुका है।

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा पर बुधवार को हुए प्रदर्शन के कारण व्यस्त मुंबई-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही बाधित हुई। किसानों की शिकायतों पर गौर करने के लिए सरकार ने एक समिति गठित की है।

सूत्रों ने बताया कि किसान चीनी मिलों तक जाने वाली प्रमुख सड़कों और राजमार्गों को अवरुद्ध कर रहे थे।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी गन्ना किसानों से पेराई सत्र जल्द शुरू कराने के लिए चीनी मिलों को सहयोग देने की अपील की है। उन्होंने गन्ने की कम पैदावार, सूखे के बीच वित्तीय चुनौतियों और चीनी की ऊंची कीमतों का हवाला दिया।

सूत्र ने कहा, “इन 19 मिलों में उत्पादित चीनी से कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।”

उसने कहा, ‘‘कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन के कारण फिलहाल किसी भी मिल में पेराई नहीं हो रही है।’’

महाराष्ट्र और कर्नाटक देश के क्रमशः दूसरे और तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य हैं।

किसानों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध करने की चेतावनी दिए जाने के बाद केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय राजधानी में किसान संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की थी। इस दौरान उनकी चिंताओं पर विचार करने के लिए नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, हालांकि, किसान संगठनों ने इस कदम को खारिज कर दिया है और उनका विरोध प्रदर्शन जारी है।

सरकार ने समिति के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है, लेकिन उसे रिपोर्ट सौंपने या उसकी सिफारिशों को लागू करने के लिए कोई स्पष्ट समयसीमा तय नहीं की है। इससे किसान नाराज हैं। उन्हें लगता है कि उनकी मांगें तत्काल पूरी नहीं होंगी।

भाषा यासिर अजय

अजय