मुंबई, 15 अक्टूबर (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई ने ‘भेदभाव-रोधी दिशानिर्देश’ जारी किए हैं जिनमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को परामर्श दिया गया है कि वे विद्यार्थियों से उनकी जातिगत पृष्ठभूमि, प्रवेश श्रेणी या प्रवेश परीक्षा में प्राप्त रैंक के बारे में सवाल न करें, क्योंकि इससे उनके मन में ‘‘जानबूझकर या अनजाने में पक्षपात की भावना’’ पैदा हो सकती है।
यह कदम संस्थान के 22 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के लगभग एक महीने बाद उठाया गया है। वाकोडे के माता-पिता ने एक शिक्षक पर बेटे के साथ जातिगत भेदभाव करने का आरोप लगाया था।
मंगलवार को जारी इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य ‘‘परिसर में समावेशिता को बढ़ावा देना और विद्यार्थियों को जाति, धर्म या सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना आपस में मेलजोल बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है’’।
दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी साथी छात्र से उसके जन्म या प्रवेश श्रेणी के बारे में पूछना अनुचित है, क्योंकि इससे जानबूझकर या अनजाने में पक्षपात की भावना पैदा हो सकती है।
दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि विद्यार्थियों, कर्मचारियों या शिक्षकों में से किसी के लिए भी विद्यार्थियों से उनकी जेईई (एडवांस्ड) की रैंक, अंक या ऐसी कोई अन्य जानकारी पूछना अनुचित है, जिससे उनकी जाति या उससे जुड़ी अन्य बातें उजागर हो सकती हैं।
संस्थान ने विद्यार्थियों से विभागों, खेल, संगीत, फिल्मों, गृह नगरों और शौक जैसी साझा रुचियों के आधार पर आपस में मेलजोल बढ़ाने का आग्रह किया।
वाकोडे 18 सितंबर को अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाए गए थे।
इस बीच, संस्थान के मुख्य द्वार पर विद्यार्थियों का विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी छात्र कल्याण के मुद्दे पर आईआईटी मुंबई प्रशासन के साथ बातचीत की मांग कर रहे हैं।
वाकोडे के माता-पिता ने आईआईटी प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई करने और उसे जवाबदेह ठहराने की मांग को लेकर आजाद मैदान में अपना अनिश्चितकालीन अनशन भी जारी रखा।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
पवनेश