नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) एशियाई खेलों में एथलेटिक्स और बैडमिंटन जैसे खेलों में भारत को अपेक्षा के अनुरूप पदक नहीं मिलने का मसला यहां खेल मंत्रालय की समीक्षा बैठक में प्रमुखता से उठा और चोटिल खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर भी सवाल उठाये गए ।
खेलमंत्री मनसुख मांडविया ने बैठक की अध्यक्षता की जिसमें खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अध्यक्ष पी टी उषा, खेल सचिव हरि रंजन राव , टारगेट ओलंपिक पोडियम (टॉप्स) और राष्ट्रीय खेल महासंघों के प्रतिनिधि मौजूद थे ।
भारत ने आइची नागोया एशियाई खेलों में 21 स्वर्ण समेत 85 पदक जीते जबकि हांगझोउ में पिछले खेलों में भारत को 106 पदक मिले थे ।
बैठक में मौजूद एक शीर्ष अधिकारी ने कहा ,‘‘ खेलमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि संसाधनों की कोई कमी नहीं थी और खेल महासंघ वित्तीय सहयोग को लेकर शिकायत नहीं कर सकते । महासंघों को सिर्फ प्रेजेंटेशन देने की बजाय मैदान पर परिणाम देने होंगे । महासंघों ने अपना पक्ष रखा और खेलमंत्री ने उन्हें भविष्य के लिये अभी से योजना बनाने के लिये कहा ।’’
समझा जाता है कि बाधा धाविका ज्योति याराजी और त्रिकूद खिलाड़ी प्रवीण चित्रावेल समेत प्रमुख खिलाड़ियों की चोटों का मसला भी उषा ने उठाया जब भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) सलाहकार आदिले सुमरिवाला प्रदर्शन पर अपना विश्लेषण पेश कर रहे थे ।
सूत्र ने कहा ,‘‘ उस समय खेलमंत्री ने कहा कि विशेष मामलों की बजाय पूरे प्रदर्शन पर फोकस करना चाहिये ।’’
खेल मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि मांडविया ने सभी एनएसएफ से यह सुनिश्चित करने को कहा कि युवा प्रतिभायें लगातार आगे आती रहें ।
उन्होंने भारात्तोलन में रजत पदक जीतने वाली मीराबाई चानू का उदाहरण देते हुए कहा ,‘‘ कब तक मीराबाई चानू अकेली हमारे लिये पदक जीतती रहेगी । हमें दस और मीराबाई चानू तैयार करनी होगी । हर महासंघ को गंभीरता से यह जिम्मेदारी लेनी होगी ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ हमें प्रतिभा को पहचानकर सही प्रशिक्षण देना होगा और ऐसा माहौल तैयार करना होगा कि खिलाड़ी शीर्ष स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर सकें ।’’
तीन स्वर्ण जीतकर मुक्केबाजों ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया और भारतीय मुक्केबाजी महासंघ ने आगे संस्थागत सहयोग जारी रहने पर इसमें सुधार का वायदा किया । इस समय महासंघ आंतरिक सत्ता संघर्ष से जूझ रहा है जिसमें अध्यक्ष अजय सिंह और सचिव प्रमोद कुमार ने एक दूसरे को बर्खास्त कर दिया है । लेकिन समीक्षा बैठक में महासंघों के भीतर चल रही कलह का मसला नहीं उठा ।
भाषा मोना नमिता
नमिता