(तस्वीरों के साथ)
अबू धाबी, 15 अक्टूबर (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि वैश्वीकरण को पलटा नहीं जा सकता, लेकिन इससे अधिक दृढ़ता के साथ तालमेल बनाना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपनी क्षमताओं का निर्माण कर रहा है और भरोसेमंद साझेदारियां स्थापित कर रहा है।
जयशंकर ने अबू धाबी में ‘रायसीना डायलॉग’ के पश्चिम एशिया संस्करण में एक परिचर्चा के दौरान यह बात कही।
इस चर्चा में ट्यूनीशिया के पूर्व प्रधानमंत्री मेहदी जोमा, डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक रिजवान और लंदन स्थित ‘सेंटर फॉर यूरोपियन रिफॉर्म’ की वरिष्ठ शोध अध्येता आर्मिडा वान रिज ने भी हिस्सा लिया।
जयशंकर ने इस मंच पर कहा कि प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है, परिवहन के अहम मार्गों पर नए अवरोध पैदा हुए हैं और देश अपनी बढ़त का फायदा उठाने के लिए पहले से अधिक तत्पर हैं।
उनकी यह टिप्पणी पश्चिम एशिया में अस्थिर स्थिति के बीच आई है। अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव बना हुआ है और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर बार-बार हमले हो रहे हैं।
जयशंकर ने कहा, ‘‘वैश्वीकरण को पलटा नहीं जा सकता, लेकिन इससे और अधिक दृढ़ता के साथ तालमेल बनाना होगा।’’
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह पहले से ही क्षेत्र में संपर्क मार्गों को लेकर सोच को आकार दे रहा है।
जयशंकर ने कहा, ‘‘वैश्विक परिदृश्य में बदलाव के साथ भारत अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है और भरोसेमंद साझेदारियां स्थापित कर रहा है।’’
आईएमईसी एक प्रस्तावित बहु-मार्गीय व्यापार, ऊर्जा और डिजिटल संपर्क नेटवर्क है, जिसकी घोषणा सितंबर 2023 में नयी दिल्ली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी।
आईएमईसी का मुख्य उद्देश्य एशिया, अरब खाड़ी क्षेत्र और यूरोप के बीच संपर्क एवं आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देकर आर्थिक विकास को गति देना है।
जयशंकर द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा के लिए तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बुधवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पहुंचे।
भाषा संतोष शफीक
शफीक