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कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता: 12 अक्टूबर के मार्च से जुड़ी याचिका पर प्रधान न्यायाधीश

नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने बृहस्पतिवार को कहा कि न्यायपालिका को कोई भी डरा-धमका नहीं सकता और अदालत जानती है कि बाहर क्या बयान दिए जा रहे हैं।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह बात कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा 12 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय तक किए गए मार्च से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कही।

प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने, शीर्ष अदालत तक मार्च करने के खिलाफ दायर याचिका पर गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, कांग्रेस पार्टी, केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी और अन्य को नोटिस जारी किये।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने पीठ से कहा कि 12 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय परिसर में जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

भाटिया ने पीठ से कहा, ‘‘यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है कि उच्चतम न्यायालय किसी राजनीतिक जुलूस के मामले से निपट रहा है।’’

जब उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को डराने-धमकाने की इस तरह की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता, तो न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘हमें कोई डरा-धमका नहीं सकता।’’

याचिका में अदालत परिसर के भीतर राजनीतिक प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और न्यायिक व्यवस्था में बाधा डालने वाले नेताओं के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और अन्य अनियमितताओं को लेकर याचिका दायर करने के लिए 12 अक्टूबर को, गांधी और विपक्ष के कई अन्य प्रमुख नेता अपने समर्थकों के साथ उच्चतम न्यायालय पहुंचे थे।

एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में कई प्रदर्शन हुए हैं।

सुनवाई के दौरान, भाटिया ने पीठ को बताया कि 200 से अधिक वकीलों ने एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें 12 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय परिसर के भीतर हुई घटना पर चिंता जताई गई है।

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को डराने-धमकाने की कोशिश चिंताजनक है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम कोई अलग-थलग दुनिया में नहीं बैठे हैं। हमें पता है कि वे बाहर क्या बयान दे रहे हैं और अदालत में क्या कह रहे हैं। हमें सबकुछ पता है।’’

भाटिया ने पीठ से कहा कि उच्चतम न्यायालय परिसर की 12 अक्टूबर की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने (याचिकाकर्ताओं ने) याचिका में उच्चतम न्यायालय परिसर की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने के लिए अंतरिम निवेदन किया है।’’

भाटिया ने बताया कि उस दिन अदालत परिसर में एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का दिया गया, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

याचिका में इस बात की ओर ध्यान दिलाया गया कि 12 अक्टूबर को शीर्ष अदालत परिसर में तब भारी भीड़ घुस आई, जब गांधी और अन्य नेता एसआईआर से जुड़ी याचिका दाखिल करने के लिए उच्चतम न्यायालय तक मार्च करके पहुंचे।

भाषा नेत्रपाल सुरेश

सुरेश