नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रतिकूल तुलनात्मक आधार, मौसम और ईंधन कीमतों में उछाल के कारण अक्टूबर में देश की थोक मुद्रास्फीति 12 प्रतिशत से अधिक और खुदरा मुद्रास्फीति छह प्रतिशत के पार जा सकती है।
रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, प्रतिकूल तुलनात्मक आधार प्रभाव की वजह से फरवरी, 2027 तक थोक कीमतों पर दबाव बना रह सकता है और थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति दहाई अंक में रह सकती है।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा, “अक्टूबर के महीने में थोक मुद्रास्फीति 12 प्रतिशत से अधिक जबकि खुदरा महंगाई छह प्रतिशत के पार जा सकती है। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट का समाधान होने पर महंगाई थोड़ा कम भी रह सकती है।”
उन्होंने कहा कि मौजूदा सख्त मौद्रिक नीति चक्र में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) नीतिगत दरों में 0.50 से 0.75 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकता है।
थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 9.92 प्रतिशत थी। वहीं, खुदरा महंगाई सितंबर में बढ़कर 23 महीने के उच्च स्तर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो अगस्त में 4.83 प्रतिशत थी।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि थोक मुद्रास्फीति पर ईंधन कीमतों, विशेषकर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बदलाव का तत्काल असर पड़ता है। इसके विपरीत, खुदरा महंगाई पर सरकार के करों एवं शुल्कों में बदलाव और पेट्रोल पंप पर ईंधन की कीमतों का असर पड़ता है। इसके अलावा रुपये में कमजोर रुख ने भी महंगाई बढ़ाने में योगदान दिया है।
पंत ने कहा कि थोक और खुदरा, दोनों स्तरों पर महंगाई का दबाव अब व्यापक होता जा रहा है। उन्होंने मौजूदा सख्त मौद्रिक नीति चक्र में आरबीआई द्वारा नीतिगत दरों में 0.50 से 0.75 प्रतिशत तक की वृद्धि का अनुमान भी जताया।
पिछले सप्ताह आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने प्रमुख नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत अंक की वृद्धि कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया था।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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