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केरल उच्च न्यायालय ने आय से अधिक संपत्ति मामले में पूर्व डीजीपी थाचनकारी की सजा पर रोक लगाई

कोच्चि, 15 अक्टूबर (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने मामले में दोषी ठहराये गये पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) टोमिन जे. थाचनकारी की सजा पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने पूर्व डीजीपी को यह राहत प्रदान की।

कोट्टयम सतर्कता अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत थाचनकारी को दोषी पाते हुए चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी और 30.84 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

यह आदेश थाचनकारी की उस अपील पर आया जिसमें उन्होंने कहा है कि सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज प्राथमिकी में शुरू में एक जनवरी 2003 से एक मार्च 2005 के बीच कथित तौर पर अर्जित संपत्ति को शामिल किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर चार जुलाई 2007 तक की अवधि के लिए कर दिया गया।

याचिका में कहा गया कि चार जुलाई 2007 को विभिन्न ठिकानों पर तलाशी ली गई और दस्तावेज जब्त किये गये।

जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई। इसके बाद मामले को विभिन्न सतर्कता अदालतों में स्थानांतरित किया गया और 2020 में कोट्टायम की सतर्कता अदालत ने इसकी सुनवाई शुरू की।

याचिका में कहा गया कि थाचनकारी ने शिकायत की थी कि उनकी आय के कई स्रोतों पर विचार नहीं किया गया और जांच अधिकारी द्वारा की गई गणना में गलतियां थीं। इसके बाद राज्य सरकार ने विस्तृत जांच का आदेश दिया।

बाद में उच्च न्यायालय ने जांच के लिए राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि सरकार ऐसी जांच का आदेश नहीं दे सकती।

अपील में हालांकि कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने जांच एजेंसी को आगे की जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी।

थाचनकारी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि केरल आपराधिक प्रक्रिया नियमावली के नियम 19(4) के तहत आवेदन देने के बावजूद उन दस्तावेजों में से किसी को भी अदालत के समक्ष पेश नहीं किया गया।

थाचनकारी ने अपील में दलील दी है कि उन्हें दोषी ठहराने का फैसला गैरकानूनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि साक्ष्यों का सही आकलन नहीं किया गया और जांच अधिकारियों द्वारा की गई गलत गणनाओं पर भरोसा किया गया।

भाषा

देवेंद्र पवनेश

पवनेश