नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) वाम दलों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही तय करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की।
वाम दलों ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग केंद्र में सत्तारूढ़ दल के हाथों की कठपुतली बन गया है।
''लोकतंत्र की हत्या'' के विरोध में ‘इंडिया’ गठबंधन के प्रदर्शन को संबोधित करते हुए माकपा के प्रदेश सचिव पी. षणमुगम ने दिल्ली में इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे छात्र और युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई की निंदा की और कहा कि विरोध प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है।
उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और मतदान के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वालों के खिलाफ पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कार्रवाई की भी आलोचना की।
षणमुगम ने सीईसी को तत्काल पद से हटाने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग सत्तारूढ़ दल के हाथों की ‘‘कठपुतली’’ बन गया है।
उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूचियों से 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने की आड़ में मुस्लिमों और वंचित समुदायों समेत कुछ खास समूहों को मतदान के अधिकार से वंचित करने की सुनियोजित कोशिश की गई है।
उन्होंने ‘इंडिया’ गठबंधन और तमिलनाडु की जनता से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने दिल्ली में छात्रों के समर्थन में एकजुटता दिखाने और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के लोकतांत्रिक सिद्धांत की रक्षा के लिए पूरे राज्य में प्रदर्शन करने की वकालत की।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के प्रदेश सचिव एम. वीरपांडियन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से इस ‘‘अन्याय’’ के खिलाफ आवाज उठाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तमिल लोगों के प्रतिनिधि हैं और उनके पास बदलाव के लिए आवाज उठाने की पर्याप्त ताकत है।
उन्होंने राजनीतिक कार्रवाई की जरूरत पर जोर देते हुए महात्मा गांधी, डॉ. बी. आर. आंबेडकर और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं के योगदान का उल्लेख किया, जिन्होंने इन बुनियादी लोकतांत्रिक मूल्यों को स्थापित करने में भूमिका निभाई।
भाषा राखी पवनेश
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