Breaking News

पंजाब में आज से 3 लाख सरकारी कर्मचारी 'हड़ताल' पर, दफ्तरों से बस सेवाओं तक पड़ेगा असर     |   एशियाई पैरा खेलों में प्रवीण कुमार ने जीता गोल्ड, बंटी ने जीता सिल्वर     |   ओम प्रकाश राजभर ने 29 नवंबर को आजमगढ़ में विशाल रैली का किया ऐलान     |   एशियाई पैरा खेलों में आयुष वर्मा ने शॉट पुट F53 इवेंट में जीता गोल्ड     |   सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ीं, दूसरा केस भी क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर     |  

किसानों के विरोध-प्रदर्शन के बीच महाराष्ट्र में 55 में से सिर्फ 15 चीनी मिलों में ही गन्ने की पेराई

नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) गन्ना किसानों के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच महाराष्ट्र की 55 चीनी मिलों में से केवल 15 में ही 2026-27 के पेराई सत्र में काम शुरू हुआ है, जबकि कर्नाटक में अबतक पेराई शुरू नहीं हुई है। किसानों की शिकायतों पर गौर करने के लिए सरकार ने एक समिति गठित की है। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र में 40 मिलों ने अक्टूबर में शुरू होने वाले पेराई सत्र से पहले की परंपरागत पूजा कर ली है, लेकिन किसानों के आंदोलन के कारण वहां पूरी तरह से कामकाज शुरू नहीं हो पाया है।

राज्य में आठ अक्टूबर से 15 मिलों ने पेराई शुरू की है।

सूत्र ने कहा, “इन 15 मिलों में उत्पादित चीनी से कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।”

सूत्रों ने कहा, ‘‘कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन के कारण फिलहाल किसी भी मिल में पेराई नहीं हो रही है।’’ हालांकि, राज्य की 28 मिलों में से आठ विशेष सत्र में उगाए गए गन्ने की पेराई कर रही हैं।

महाराष्ट्र और कर्नाटक देश के क्रमशः दूसरे और तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य हैं।

दोनों राज्यों के किसान गन्ने के लिए अधिक समर्थन मूल्य और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग कर रहे हैं।

किसानों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध करने की चेतावनी दिए जाने के बाद केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय राजधानी में किसान संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की थी। इस दौरान उनकी चिंताओं पर विचार करने के लिए नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, हालांकि, किसान संगठनों ने इस कदम को खारिज कर दिया है और उनका विरोध प्रदर्शन जारी है।

सरकार ने समिति के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है, लेकिन उसे रिपोर्ट सौंपने या उसकी सिफारिशों को लागू करने के लिए कोई स्पष्ट समयसीमा तय नहीं की है। इससे किसान नाराज हैं। उन्हें लगता है कि उनकी मांगें तत्काल पूरी नहीं होंगी।

भाषा यासिर अजय

अजय