नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली बार काउंसिल ने न्यायाधीशों पर निजी हमलों की निंदा करते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखा है और बार काउंसिल के सभी सदस्यों और जिम्मेदार नागरिकों से न्यायपालिका की आलोचना करते समय संयम बरतने की अपील की है।
बार काउंसिल ने 13 अक्टूबर को लिखे पत्र में कहा कि न्यायपालिका संवैधानिक लोकतंत्र का एक अनिवार्य स्तंभ है और कानून का शासन तभी कायम रह सकता है तथा फल-फूल सकता है, जब देश में एक स्वतंत्र और प्रभावी न्यायिक व्यवस्था हो।
यह पत्र कांग्रेस की केरल इकाई की ओर से सोशल मीडिया पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत से इस्तीफे की मांग किए जाने के बाद उत्पन्न बड़े राजनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि में आया है।
पत्र में कहा गया है, ‘‘ठोस सबूतों के बिना अपुष्ट और सनसनीखेज आरोप लगाना, विशेष रूप से सार्वजनिक मंचों और डिजिटल माध्यमों पर, अनुचित पूर्वाग्रह पैदा करता है, न्याय वितरण प्रणाली के नियमित कामकाज में बाधा डालता है और जनता की नजरों में अदालतों की गरिमा को कम करता है।’’
पत्र में आगे कहा गया है, ‘‘न्यायिक फैसलों की रचनात्मक आलोचना लोकतांत्रिक समाज की एक मान्य विशेषता है, लेकिन निराधार व्यक्तिगत हमले बर्दाश्त नहीं किए जा सकते और उनकी निंदा की जानी चाहिए।’’
बार काउंसिल ने कहा कि वह बार के सभी सदस्यों और जिम्मेदार नागरिकों से संयम बरतने, कानून की गरिमा बनाए रखने और संस्थानों की विश्वसनीयता को कमजोर करने वाले निराधार दावों को बढ़ावा देने से बचने की अपील करती है।
भाषा मनीषा वैभव
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