नैनीताल, 15 अक्टूबर (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने देहरादून के क्लेमेंट टाउन और छावनी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले एक नाले पर और उसके आसपास कथित अतिक्रमण से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिकारियों को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए देहरादून के जिलाधिकारी को याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए प्रतिवेदन पर छह महीने के भीतर निर्णय लेने और अतिक्रमण हटाने के संबंध में कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि कोई निर्णय लेने से पहले कथित अतिक्रमणकारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और छावनी बोर्ड को मौके का निरीक्षण करने और यह बताने का निर्देश दिया था कि वहां कोई अतिक्रमण है या नहीं।
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार और छावनी बोर्ड ने अदालत को बताया कि नाले पर और उसके आसपास वास्तव में अतिक्रमण किया गया है तथा यह क्षेत्र छावनी बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आता है।
अदालत को यह भी बताया गया कि संबंधित विभागों के अधिकारियों की एक टीम गठित की जाएगी, जो अतिक्रमण की पहचान करेगी। यह प्रक्रिया दशहरा की छुट्टियों के बाद शुरू की जाएगी। इसके बाद संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा और नाले पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
मामले के अनुसार, क्लेमेंट टाउन निवासी संजय कुमार ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि भरूवाला क्षेत्र से होकर एक नाला गुजरता है, जो अंततः बिंदाल नदी में मिलता है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कई लोगों ने नाले पर और उसके आसपास अतिक्रमण कर रखा है तथा इसके कुछ हिस्सों को भर दिया है। इससे क्षेत्र में बाढ़ आने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने अतिक्रमण हटाने की मांग की थी।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उन्होंने अतिक्रमण हटाने के लिए 12 अगस्त को जिलाधिकारी, छावनी बोर्ड और अन्य संबंधित विभागों को प्रतिवेदन दिया था। हालांकि, अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
इसलिए उन्होंने अदालत से संबंधित अधिकारियों को नाले से अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
भाषा खारी वैभव
वैभव