नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना के तहत एकमात्र गारंटी प्रौद्योगिकी आधारित बहिष्करण, केंद्रीकरण और ग्राम पंचायतों को शक्तिहीन करने की है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि अप्रैल, 2012 में पहली बार सूखा प्रभावित गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत काम की पात्रता बढ़ाकर 150 दिन की गई थी।
उनका कहना है कि इसके बाद जुलाई, 2013 में इस विशेष प्रावधान का विस्तार बाढ़ प्रभावित उत्तराखंड तक किया गया और जनवरी 2014 में वन अधिकार अधिनियम (एफआरए), 2006 के सभी लाभार्थियों को भी इसके दायरे में लाया गया।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने ‘विकसित भारत-जी राम जी’ (वीबी-जी राम जी) को संसद से ‘‘जबरन पारित’’ कराकर काम के संवैधानिक अधिकार और मनरेगा के तहत मजदूरी में वृद्धि के वैधानिक अधिकार को समाप्त कर दिया।
रमेश ने दावा किया कि इसके कारण अब वन अधिकार अधिनियम, 2006 के लाखों लाभार्थी भी 150 दिनों के रोजगार की पात्रता से वंचित हो गए हैं। इन लाभार्थियों में आदिवासी और अन्य परंपरागत वनवासी समुदायों के लोग शामिल हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन समुदायों के लाखों लोगों को पहले ही जॉब कार्ड हटाए जाने तथा आधार आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) और राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस) के अनिवार्य इस्तेमाल के कारण योजना से बाहर किया जा चुका है।
रमेश ने कहा, ‘‘वीबी-जी राम जी के तहत एकमात्र गारंटी प्रौद्योगिकी आधारित बहिष्करण, केंद्रीकरण और ग्राम पंचायतों को शक्तिहीन करने की है।’’
भाषा हक वैभव
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