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धर्मांतरण के बाद सामाजिक पिछड़ापन हिंदू से गैर-हिंदू व्यवस्था में स्थानांतरित नहीं हो सकता :न्यायालय

नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा दूसरा धर्म अपनाए जाने के बाद उसका सामाजिक पिछड़ापन हिंदू सामाजिक व्यवस्था से गैर-हिंदू सामाजिक व्यवस्था में स्थानांतरित नहीं हो सकता।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर तमिलनाडु सरकार की याचिका खारिज कर दी। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि इस्लाम अपनाने वाला व्यक्ति केवल धर्मांतरण के आधार पर पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी के तहत आरक्षण का दावा नहीं कर सकता।

शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें मुसलमान धर्म अपनाने वालों को आरक्षण देने संबंधी तमिलनाडु सरकार की अधिसूचना रद्द कर दी गई थी। न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।

शीर्ष अदालत ने सात अगस्त को राज्य सरकार की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी।

राज्य सरकार की अपील में कहा गया है कि विवादित फैसले से ऐसे महत्वपूर्ण सवाल खड़े होते हैं जो एक विशेषज्ञ वैधानिक आयोग की सिफारिश पर तैयार की गई कार्यकारी नीति में हस्तक्षेप के स्वीकार्य दायरे से जुड़े हैं।

भाषा शोभना वैभव

वैभव